600 वर्ष पुराने विश्व प्रसिद्ध श्रीसिद्धपीठ पंचमुखी महादेव मंदिर में सावन के प्रथम दिन बनारस की तर्ज पर गूंजी भव्य शिव महाआरती, उमड़ा आस्था का सैलाब
600 वर्ष प्राचीन पंचमुखी महादेव मंदिर में सावन महोत्सव का शुभारंभ
मीरापुर (सच कहूँ/कोमल कुमार)। Miranpur News: सावन माह के प्रथम दिन तहसील जानसठ के ग्राम सम्भलहेडा स्थित विश्व प्रसिद्ध श्रीसिद्धपीठ पंचमुखी महादेव मंदिर में बनारस की तर्ज पर भव्य एवं दिव्य शिव महाआरती, शिव तांडव और गंगा आरती का भव्य आयोजन किया गया। इस दिव्य आयोजन में क्षेत्र सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। दीपों की अलौकिक छटा, वैदिक मंत्रोच्चार और "हर-हर महादेव" के गगनभेदी जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
मंदिर के आचार्य पंडित अंकज भारद्वाज ने बताया कि दोपहर 4 बजे भगवान आशुतोष का वैदिक विधि-विधान के साथ रुद्राभिषेक संपन्न कराया गया। इसके उपरांत शाम 7 बजे काशी (बनारस) से आए विद्वान वैदिक ब्राह्मणों ने भव्य शिव महाआरती, शिव तांडव एवं गंगा आरती का आयोजन कराया। आरती के दौरान श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में पूरी तरह लीन दिखाई दिए। मंदिर में गूंजते शंख, घंटों और डमरुओं की ध्वनि ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। कार्यक्रम के समापन पर अक्षय चौधरी के सहयोग से सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
पंडित अंकज भारद्वाज ने बताया कि पूरे सावन माह प्रतिदिन रुद्राभिषेक, शिव महाआरती, शिव तांडव और गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की आराधना में सहभागी बनने का आह्वान किया।
करीब 600 वर्ष प्राचीन श्रीसिद्धपीठ पंचमुखी महादेव मंदिर देश के प्रमुख शिवधामों में अपनी अलग पहचान रखता है। लगभग 30 बीघा क्षेत्र में फैला यह भव्य मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला, विशाल परिसर और अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को असीम शांति और दिव्य ऊर्जा का अनुभव होता है। मान्यता है कि यहां भगवान पंचमुखी महादेव का जलाभिषेक और सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार नेपाल के काठमांडू और उज्जैन के बाद इस स्वरूप का पंचमुखी महादेव मंदिर सम्भलहेडा में स्थापित है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। पिछले वर्षों में प्रदेश सरकार के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कराया गया, जिसके बाद इसकी भव्यता और आकर्षण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
वैसे तो वर्षभर देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सावन मास में मंदिर की विशेष महत्ता रहती है। सावन के पहले दिन से ही विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो जाता है। वहीं महाशिवरात्रि और सावन के अंतिम दिनों में हरिद्वार से गंगाजल लेकर आने वाले लाखों कांवड़िये यहां भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। इसी कारण श्रीसिद्धपीठ पंचमुखी महादेव मंदिर सावन मास में आस्था, श्रद्धा और शिवभक्ति का प्रमुख केंद्र बन जाता है।
