Statistics

आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों को अनसुना कब तक करें?

आत्महत्या का नाम सुनते ही आंखों के सामने मौत का एक भयावह मंजर खड़ा हो जाता है। एक डरावना शब्द, जो कल तक शब्दकोष में कहीं गुम था, वो आज देश में, समाज में और घर में इस कदर स्थापित हो गया है कि हर कोई इससे डरा सहमा है। कहने को इसके अर्थ मनचाही […]
लेख