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Sunday, April 19, 2026
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    कृषि कनूनों के विरोध का अनोखा ढंग

    Farmer-Protest-in-Punjab

    ‘हमारी धरती अन्न उगाने के लिए है, कॉरपोरेट घरानों के मुनाफों के लिए नहीं’ (Farmer Protest in Punjab)

    सच कहूँ/सुखजीत मान महेशरी (मोगा)। तीन नये खेती कानूनों के खिलाफ छिड़े आंदोलन का दायरा दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। बच्चें, बूढ़े और नौजवान दिल्ली की तरफ कूच कर रहे हैं। हर कोई अपने-अपने तरीके से इस आंदोलन में अपना योगदान दे रहा है। मोगा जिले के गांव महेशरी की तो अब दीवारें भी किसानों के हक में बोलने लगी है।  दीवारों पर लिखे खेती कानूनों के खिलाफ और किसान-मजदूर एकता के नारे केंद्र सरकार को ललकार रहे हैं। विवरण मुताबिक गांव महेशरी निवासी और सर्व भारत नौजवान सभा के राज्य सचिव सुखजिन्दर सिंह ने दीवार पर पेंटिंग करने का मन बनाया तो गांववासी भी साथ जुट गए।

    दीवारों पर पंजाबी के अलावा हिंदी और अंग्रेजी में लिखे जा रहे कानूनो के विरोध में नारे

    • बच्चे दीवार साफ कर रहे हैं, बुजुर्ग प्रोत्साहन दे रहे हैं।
    • कोई सीढ़ी उठा रहा है और कोई घर से चाय बनाकर ला रहा है।
    • युवाओं को ‘डटे रहो’ का संदेश दे रहे हैं।
    • सुखजिन्दर सिंह ने ‘सच-कहूँ’ के साथ बातचीत करते बताया  है।
    • आज जब हर वर्ग किसान आंदोलन में अपना योगदान दे रहा है।
    • उन्होंने सोचा कि अपने हुनर से भी योगदान दिया जाए।
    • उन्होंने कहा कि यह प्रयास गांव-गांव होना चाहिए।

    नौजवान सभा के ही मैंबर सुखा ने अपने पेंटिंग ब्रुशों के जरिये दीवारों को बोलने लगा दिया। उसको देखकर ही गांव के कुछ नौजवान पेंटिंग में माहिर होने लगे हैं। पंजाबी के अलावा हिंदी और अंग्रेजी में नारे लिखे हैं। गांव निकलने वाले राहगीर भी रूक-रूक कर यह नारे पढ़ते हैं।

    Farmer-Protest

    गांव की बड़ी दीवार पर लिखा है कि ‘हमारी धरती सरबत के भले के लिए अन्न उगाने के लिए है’

    गांव में माहौल ऐसा बन गया है कि लोग इन नौजवान के पास आकर यह कह रहे हैं कि हमारी दीवार पर भी नारे लिखो। गांव की लिंक सड़क पर स्थित खेती मोटर वाले कमरों पर पर भी ‘नो फार्मर, नो फूड’ के अलावा ‘सभी फसलों की कम से कम समर्थन मूल्य ऐमऐसपी और खरीद की गारंटी करो’ आदि नारे लिखे हुए हैं। गांव की बड़ी दीवार पर लिखा है कि ‘हमारी धरती सरबत के भले के लिए अन्न उगाने के लिए है, कॉरपोरेट घरानो के मुनाफों के लिए नहीं’ नौजवान सुखजिन्दर सिंह ने बताया कि गांव के कुछ मजदूर व्यक्ति जो दिल्ली आंदोलन में नहीं जा सके। वह अपनी मजदूरी छोड़कर यहां साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेत की चौकीदारी के लिए छिड़े इस आंदोलन में हर किसी को अपना योगदान देना चाहिए, जिससे केन्द्र सरकार को खेती बिल वापिस लेने के लिए मजबूर किया जा सके।

    लोग नारे लिखे दीवारों के साथ करवा रहे तस्वीरें (Farmer Protest in Punjab)

    किसान आंदोलन को लेकर इन दीवारों पर लिखे गए नारों का मूल्य इतना ज्यादा बढ़ गया है कि गांववासियों के अलावा आम राहगीर भी दीवारों पर की गई पेंटिंग के साथ खड़े होकर फोटो करवा रहे हैं।   महेशरी गांव की यह तस्वीरें जब सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो राजस्थान के जिला श्रीगंगानगर जिले से भी नौजवानों के पास फोन आया है कि उनके गांव में भी इस तरह के नारे लिखे जाएं।

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