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Vegetable farming: अगस्त में इन सब्जियों की करें खेती! जानें बुआई का सही समय व ऐसे करें खेत तैयार
मूली, गाजर और शलगम की खेती, खरीफ प्याज के लिए भी बेहतर समय
Vegetable farming in August: नई दिल्ली। अगस्त का महीना सब्जी उत्पादक किसानों के लिए आगामी फसल की तैयारी का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान किसान मूली, शलगम और गाजर की अगेती देसी किस्मों की बुआई शुरू कर सकते हैं। साथ ही खरीफ प्याज की पौध रोपाई के लिए खेत को तैयार करना भी जरूरी है। यदि खेत की तैयारी, बीज की मात्रा, पौधों की दूरी और पोषक तत्वों का संतुलन सही रखा जाए तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर हो सकते हैं। Vegetable farming
अगस्त में इन सब्जियों की करें बुआई
अगस्त में अनुकूल परिस्थितियों में मूली, शलगम और गाजर की अगेती किस्में बोई जा सकती हैं। किसानों के लिए मूली में पूसा चेतकी, शलगम में पूसा व्हाइट-4 और गाजर में पूसा केसर जैसी किस्में उपयोगी विकल्प हो सकती हैं। प्रति एकड़ बीज की मात्रा की बात करें तो लगभग 3 किलोग्राम मूली, 2 किलोग्राम शलगम और 4 किलोग्राम गाजर का बीज पर्याप्त माना जाता है। बुआई से पहले खेत की मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरी कर लें और खरपतवार को पूरी तरह हटा दें।
गाजर की बुआई में रखें दूरी का ध्यान
गाजर जड़ वाली फसल है, इसलिए इसकी खेती में मिट्टी की संरचना और खेत की तैयारी का विशेष महत्व है। हल्की मेड़ या उठी हुई क्यारी पर बुआई करने से जड़ों को बढ़ने के लिए बेहतर वातावरण मिल सकता है। गाजर की कतारों के बीच करीब 30 से 45 सेंटीमीटर तथा पौधों के बीच लगभग 8 सेंटीमीटर दूरी रखी जा सकती है। मूली और शलगम में भी फसल के अनुसार उचित दूरी बनाए रखना जरूरी है। खेत में पानी का ठहराव जड़ वाली सब्जियों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इसलिए बुआई से पहले जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूर करें। Vegetable farming
जैविक खाद के साथ संतुलित पोषण जरूरी
खेत तैयार करते समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में मिलाने से उसकी संरचना और जैविक गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। उपलब्ध कृषि सलाह के अनुसार मूली, शलगम और गाजर के लिए प्रति एकड़ लगभग 20 टन सड़ी गोबर की खाद, 24 किलोग्राम नाइट्रोजन और 75 किलोग्राम सिंगल सुपरफॉस्फेट का उपयोग किया जा सकता है।
गाजर की फसल के लिए इसके अतिरिक्त करीब 20 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति एकड़ देने की सलाह दी गई है। हालांकि खाद और उर्वरक की मात्रा मिट्टी की जांच तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार तय करना बेहतर रहेगा।
खरीफ प्याज की रोपाई के लिए अभी करें तैयारी
खरीफ प्याज की पौध की रोपाई आमतौर पर अगस्त के दूसरे पखवाड़े से सितंबर के शुरुआती दिनों के बीच की जा सकती है। ऐसे में किसानों को अभी से खेत की तैयारी पूरी कर लेनी चाहिए। प्रति एकड़ लगभग 10 से 12 टन अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद खेत में मिलाई जा सकती है। इसके साथ करीब 25 किलोग्राम नाइट्रोजन, जो लगभग 55 किलोग्राम यूरिया के बराबर है, तथा करीब 15 किलोग्राम फास्फोरस, यानी लगभग 94 किलोग्राम सिंगल सुपरफॉस्फेट देने की सलाह दी गई है। खेत तैयार होने के बाद उसे उचित आकार की क्यारियों में बांटकर प्याज की पौध लगाना सुविधाजनक रहता है। Vegetable farming
प्याज की पौध लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
नर्सरी में तैयार स्वस्थ और समान विकास वाली पौध को ही मुख्य खेत में लगाने का प्रयास करें। प्याज की रोपाई हल्की डोलियों या उठी हुई क्यारियों पर करने से जल निकासी बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। रोपाई के दौरान कतार से कतार करीब 15 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी लगभग 10 सेंटीमीटर रखी जा सकती है। पौध लगाने के बाद खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें, लेकिन सिंचाई के कारण पानी जमा न होने दें।
किसानों के लिए जरूरी सुझाव
बुआई से पहले खेत की मिट्टी को भुरभुरा करें।
खरपतवार को हटाकर खेत साफ रखें।
बीज और पौध की मात्रा फसल की जरूरत के अनुसार रखें।
जड़ वाली सब्जियों में जलभराव से बचें।
अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद का इस्तेमाल करें।
उर्वरक की मात्रा मिट्टी की जांच के आधार पर तय करना बेहतर है।
प्याज की रोपाई के लिए स्वस्थ और समान आकार की पौध चुनें।
सिंचाई के दौरान खेत में पानी लंबे समय तक जमा न रहने दें।
नोट: उर्वरकों की वास्तविक मात्रा मिट्टी की उर्वरता, किस्म, क्षेत्र और स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय/कृषि विभाग की अनुशंसाओं के अनुसार समायोजित करें। Vegetable farming