PoK Protest: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में क्यों भड़का आंदोलन? उठे सवाल

अंतरराष्ट्रीय: आंदोलन में विधानसभा की बारह आरक्षित सीटें प्रमुख मुद्दा बनी

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PoK Crisis: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में पिछले कई सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों ने वहां की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को गंभीर बना दिया है। महंगाई, बिजली और आटे की कीमतों, रोजगार, राजनीतिक अधिकारों तथा विधानसभा में प्रतिनिधित्व से जुड़े सवालों ने धीरे-धीरे व्यापक जनअसंतोष का रूप ले लिया। PoK Protest

इस आंदोलन का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति कर रही है, जिसे जून 2026 में स्थानीय प्रशासन ने प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बाद गिरफ्तारियों और सुरक्षाबलों की कार्रवाई ने तनाव और बढ़ा दिया। आंदोलन का एक प्रमुख मुद्दा विधानसभा की उन बारह सीटों का है, जो पाकिस्तान में रह रहे जम्मू-कश्मीर के विस्थापित लोगों के लिए आरक्षित हैं।प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इन सीटों के माध्यम से क्षेत्र के वास्तविक मतदाताओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ता है। इसके साथ ही सस्ता आटा, बिजली की उचित दर, रोजगार, प्रशासन में जवाबदेही और स्थानीय अधिकार जैसी मांगें भी आंदोलन का हिस्सा हैं। 

जून में हुई हिंसक झड़पों के बाद स्थिति और गंभीर हुई। रावलाकोट सहित कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच संघर्ष की खबरें सामने आईं। इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं पर प्रतिबंध, गिरफ्तारियां तथा बाजारों और परिवहन के बंद रहने से आम जनजीवन प्रभावित हुआ। हालांकि मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। उपलब्ध स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में अगस्त के आरंभ तक चालीस से अधिक प्रदर्शनकारियों और सात सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की जानकारी दी गई है। ऐसे में अस्सी या नब्बे मृतकों के आंकड़े को निर्विवाद तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

अशांति का असर विधानसभा चुनाव पर भी पड़ा। 45 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव तीन चरणों में कराने की व्यवस्था की गई थी। सत्ताईस जुलाई को पहले चरण में तेरह सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज ने नौ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने चार सीटें जीतीं। दूसरे चरण का मतदान दो अगस्त को हुआ, जबकि रावलाकोट और आसपास के तनावग्रस्त क्षेत्रों में तीसरे चरण की प्रक्रिया कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण प्रभावित हुई। PoK Protest

चुनाव के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हुए। विपक्षी दलों और आंदोलन से जुड़े लोगों ने मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए, जबकि प्रशासन ने हिंसा के लिए प्रतिबंधित संगठन को जिम्मेदार ठहराया। इस टकराव ने चुनाव को सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय गहरे राजनीतिक विवाद का विषय बना दिया। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में पहले से मौजूद प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक अधिकारों की बहस अब चुनावी विश्वसनीयता से भी जुड़ गई है। स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान गया है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के हताहत होने पर चिंता जताते हुए जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से भी देख रही हैं। भारत ने भी घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत का आधिकारिक रुख है कि जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान का वहां नियंत्रण अवैध है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हिंसा और मानवाधिकार संबंधी आरोपों पर चिंता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की बात कही है। साथ ही भारत ने वहां कराए जा रहे विधानसभा चुनावों को पाकिस्तान के नियंत्रण को राजनीतिक स्वरूप देने की कोशिश के रूप में देखा है। PoK Protest

पाकिस्तान के लिए यह संकट ऐसे समय आया है, जब देश पहले से आर्थिक दबाव, राजनीतिक अस्थिरता और विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे माहौल में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर का आंदोलन प्रशासन के लिए अतिरिक्त चुनौती बन गया है। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे पाकिस्तान की केंद्रीय सत्ता पर तत्काल कोई निर्णायक असर पड़ेगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि स्थानीय असंतोष को लंबे समय तक बलपूर्वक दबाकर स्थायी शांति स्थापित करना कठिन होगा।

आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि इस्लामाबाद और क्षेत्रीय प्रशासन प्रदर्शनकारियों की मांगों को किस तरह संबोधित करते हैं। संवाद, निष्पक्ष जांच, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नागरिक अधिकारों को लेकर भरोसा बहाल करना तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। फिलहाल पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर का घटनाक्रम यह संकेत देता है कि आर्थिक परेशानियां जब राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों के सवाल से जुड़ती हैं, तो उनका प्रभाव व्यापक और लंबे समय तक रहने वाला हो सकता है। PoK Protest

डॉ. संदीप सिंहमार (यह लेखक के अपने विचार हैं)।  

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