Land Purchase: जमीन खरीदने से पहले जरूर चेक करें ये 7 कागज, एक गलती पड़ सकती है भारी

जमीन खरीदने से पहले जरूर चेक करें ये 7 कागज, एक गलती पड़ सकती है भारी

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Land Purchase: प्रतापनगर, राजेन्द्र कुमार। जमीन खरीदना हर किसी के लिए बड़ा आर्थिक फैसला होता है। लोग अपनी वर्षों की जमा-पूंजी लगाकर प्लॉट, खेत या घर बनाने के लिए जमीन खरीदते हैं। लेकिन अगर जमीन खरीदने से पहले उसके दस्तावेजों की ठीक से जांच न की जाए तो बाद में कानूनी विवाद, कर्ज या मालिकाना हक से जुड़ी परेशानी सामने आ सकती है।

सिर्फ जमीन देखकर या बेचने वाले की बात पर भरोसा करके सौदा करना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए पैसा लगाने से पहले कुछ जरूरी दस्तावेजों की जांच कर लेना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं वे 7 कागज, जिन्हें जमीन खरीदने से पहले जरूर देखना चाहिए।

1. सेल डीड यानी रजिस्ट्री | Land Purchase

सबसे पहले जमीन की सेल डीड (Sale Deed) यानी रजिस्ट्री की जांच करें। इससे यह पता चलता है कि जमीन का मौजूदा मालिक कौन है और उसे जमीन बेचने का अधिकार है या नहीं।

रजिस्ट्री में जमीन का खसरा नंबर, क्षेत्रफल, मालिक का नाम और दूसरी जरूरी जानकारियां दर्ज होती हैं। इन जानकारियों को सरकारी भूमि रिकॉर्ड से मिलाना भी जरूरी है। सिर्फ रजिस्ट्री की कॉपी देखकर संतुष्ट न हों।

2. मदर डीड से जानें जमीन का इतिहास

मदर डीड (Mother Deed) जमीन के पुराने मालिकाना रिकॉर्ड को समझने में मदद करती है। इससे पता चलता है कि जमीन पहले किसके नाम थी और समय के साथ उसका मालिकाना हक किस तरह बदला।

अगर जमीन के मालिकाना हक की पूरी कड़ी में कोई दस्तावेज गायब है, तो आगे चलकर विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए जमीन के पुराने रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है।

3. एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट जरूर देखें

Encumbrance Certificate (EC) से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि जमीन पर कोई दर्ज कर्ज, बंधक या अन्य कानूनी लेन-देन तो नहीं है।

अगर जमीन बैंक के पास गिरवी है और खरीदार ने इसकी जांच नहीं की, तो भविष्य में परेशानी हो सकती है। इसलिए सौदा करने से पहले जमीन पर किसी मौजूदा बोझ की जानकारी जरूर हासिल करें।

4. खसरा-खतौनी या जमाबंदी रिकॉर्ड चेक करें

जमीन के रिकॉर्ड का नाम अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकता है। कहीं खसरा-खतौनी, तो कहीं जमाबंदी जैसे रिकॉर्ड इस्तेमाल होते हैं।

इन दस्तावेजों में जमीन का खसरा नंबर, क्षेत्रफल और मालिकाना जानकारी मिल सकती है। खास तौर पर यह जरूर जांचें कि बेचने वाला जितनी जमीन का दावा कर रहा है, रिकॉर्ड में भी उतना ही क्षेत्रफल दर्ज है या नहीं।

5. म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज रिकॉर्ड

म्यूटेशन (Mutation) को कई जगह दाखिल-खारिज भी कहा जाता है। जमीन के मालिकाना हक में बदलाव होने के बाद सरकारी रिकॉर्ड में इसकी एंट्री की जाती है।

जमीन खरीदते समय यह देखना जरूरी है कि बेचने वाले व्यक्ति का नाम संबंधित सरकारी रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज है या नहीं। इससे मालिकाना हक की स्थिति समझने में मदद मिलती है।

6. जमीन का नक्शा और सीमाएं मिलाएं

जमीन का नक्शा और उसकी सीमाएं भी जरूर जांचें। कागजों में जमीन का क्षेत्रफल या सीमा कुछ और हो और मौके पर स्थिति अलग हो तो बाद में विवाद हो सकता है।

खसरा नंबर, क्षेत्रफल, चारों तरफ की सीमाएं और मौके पर मौजूद जमीन को रिकॉर्ड से मिलाएं। प्लॉट खरीदते समय यह भी देखना जरूरी है कि जमीन तक पहुंचने का रास्ता क्या है और वह रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं।

7. कहीं जमीन पर कोई केस तो नहीं चल रहा?

जमीन खरीदने से पहले यह पता करना जरूरी है कि उस जमीन को लेकर कोर्ट केस, पारिवारिक विवाद, अधिग्रहण या कोई अन्य कानूनी समस्या तो नहीं है।

खासकर ऐसी जमीन के मामले में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है, जिस पर कई लोगों का मालिकाना दावा हो सकता है। केवल एक व्यक्ति से जमीन खरीद लेने के बाद दूसरा पक्ष कानूनी दावा कर सकता है।

सिर्फ 7 कागज देखकर तुरंत न करें सौदा

इन दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है, लेकिन इसके बाद भी जल्दबाजी में पूरी रकम देना सही नहीं है। सभी दस्तावेजों में नाम, खसरा नंबर, क्षेत्रफल और जमीन की सीमाओं को आपस में मिलाएं।

अगर जमीन विरासत में मिली है, कई लोगों के नाम दर्ज है या किसी विवाद की जानकारी सामने आती है तो स्थानीय वकील या प्रॉपर्टी कानून के जानकार से दस्तावेजों की जांच करवाना बेहतर रहेगा।

जमीन खरीदते समय सबसे जरूरी बात यही है कि सिर्फ ब्रोकर या बेचने वाले की बात पर भरोसा न करें। सरकारी रिकॉर्ड और मूल दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही सौदा आगे बढ़ाएं।

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