Polyhouse Farmers Protest: किसानों का NHB के खिलाफ प्रदर्शन, 50% सहायता बहाली की मांग

मंत्री की सब्सिडी का बोझ पॉलीहाउस किसान क्यों उठाएँ? उपाध्यक्ष और कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी से जवाब की मांग

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Polyhouse Farmers Protest: नई दिल्ली/गुरुग्राम। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की पॉलीहाउस और संरक्षित खेती से जुड़ी सहायता व्यवस्था में बदलाव को लेकर किसानों और संरक्षित खेती उद्योग से जुड़े लोगों का विरोध तेज हो गया है। किसानों का कहना है कि नए नियमों और लंबित Grant of Clearance (GoC) आवेदनों को लेकर स्पष्टता नहीं होने से कई परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

NHB ने 21 अगस्त 2026 को Commercial Horticulture और Cold Storage Schemes के दिशानिर्देशों में संशोधन किया था। इसके बाद सामान्य क्षेत्रों में संरक्षित खेती से जुड़ी वित्तीय सहायता को लेकर किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई। NHB ने 4 सितंबर को Scheme No. 1 और Scheme No. 2 के तहत नई GoC applications की प्राप्ति को अस्थायी रूप से रोकने का सर्कुलर भी जारी किया।

किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?

प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि 21 अगस्त से पहले नियमों के तहत पात्र और प्रक्रिया में शामिल परियोजनाओं को पुराने प्रावधानों के अनुसार ही पूरा किया जाना चाहिए। उनका आग्रह है कि पहले से जमा आवेदनों, जारी या लंबित GoC, बैंक ऋण और निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए संक्रमण संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

किसानों की मांगों में 50 प्रतिशत सहायता को बहाल करना, 21 अगस्त के सर्कुलर की समीक्षा या वापसी और भविष्य के नियम तय करने से पहले किसानों, निर्माताओं, बैंकों तथा अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा शामिल है। प्रदर्शन से जुड़े संगठनों ने नए आवेदनों की शुरुआत और लंबित मामलों के निपटारे के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की भी मांग की है।

किसान संगठनों के अनुसार सामान्य क्षेत्रों में सहायता दर को 50 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत किए जाने से नई पॉलीहाउस परियोजनाओं की लागत और वित्तीय व्यवहार्यता प्रभावित हो सकती है। अगस्त में जारी NHB संशोधन में संरक्षित खेती के लिए सहायता से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं।

किसानों का कहना है कि जिन लोगों ने पहले ही बैंक से ऋण स्वीकृत करा लिया है या निर्माण शुरू कर दिया है, उनके लिए नियमों में अचानक बदलाव अतिरिक्त वित्तीय दबाव पैदा कर सकता है। उनका आग्रह है कि ऐसे मामलों में पुराने नियमों के तहत सुरक्षा दी जाए और प्रशासनिक देरी के कारण प्रभावित परियोजनाओं को अतिरिक्त समय दिया जाए।

निर्माताओं और रोजगार पर भी चिंता

पॉलीहाउस किसानों के साथ ग्रीनहाउस निर्माता, प्लास्टिक फिल्म और नेट सप्लायर तथा निर्माण क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी भी अभियान में शामिल हुए हैं। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि नई परियोजनाओं की मंजूरी और GoC प्रक्रिया में लंबा अंतराल रहता है तो नए ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं। किसानों और उद्योग से जुड़े लोगों ने NHB से मंजूरियों, लंबित आवेदनों और दावों की स्थिति सार्वजनिक करने तथा प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा घोषित करने की मांग की है।

आयोजकों के अनुसार अभियान के तहत गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, हरियाणा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के पॉलीहाउस किसान तथा संरक्षित खेती से जुड़े लोग सामने आए हैं। 25 सितंबर को भी देश के विभिन्न हिस्सों में NHB के राज्य कार्यालयों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य लंबित परियोजनाओं और नई आवेदन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट नीति हासिल करना है, ताकि किसान निवेश और बैंकिंग संबंधी फैसले निश्चित नियमों के आधार पर ले सकें।

मंत्री भागीरथ चौधरी की सब्सिडी का मुद्दा भी उठा

विरोध के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी से जुड़ी पॉलीहाउस/खीरा परियोजना की सब्सिडी का मामला भी उठाया गया। रिपोर्टों के अनुसार उनकी परियोजना को NHB की योजना के तहत करीब 99 लाख रुपये की सहायता मिली थी। बाद में केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि चौधरी ने सब्सिडी राशि वापस करने की सूचना दी थी।

इस मामले के बाद NHB ने अगस्त में योजना के पात्रता नियमों में बदलाव किए। संशोधित नियमों में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और कुछ अन्य सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को सहायता से बाहर किया गया तथा परिवार की परिभाषा में भी बदलाव किया गया। किसानों का कहना है कि किसी विशेष मामले से जुड़े विवाद के कारण सामान्य किसानों की पुरानी परियोजनाओं पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए। वे चाहते हैं कि NHB स्पष्ट करे कि पुराने और नए मामलों पर कौन से नियम लागू होंगे।

किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों ने पॉलीहाउस से जुड़ी सामग्री पर लागू 18 प्रतिशत GST को घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग भी रखी है। इसके अलावा उनका कहना है कि सहायता के लिए स्वीकार्य लागत को मौजूदा बाजार कीमतों के अनुरूप अपडेट किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारी पक्ष ने संरक्षित खेती के लिए अलग से पर्याप्त बजट प्रावधान की मांग करते हुए यह जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है कि कितनी राशि आवंटित, जारी और खर्च की गई तथा कितने प्रोजेक्ट लंबित हैं।

किसानों को लिखित जवाब का इंतजार

किसानों का कहना है कि GoC के नए आवेदन कब शुरू होंगे, लंबित मामलों का निपटारा कब तक होगा और पहले से स्वीकृत बैंक ऋण वाली परियोजनाओं पर पुराने या नए नियम कैसे लागू होंगे—इन सभी सवालों पर NHB से स्पष्ट लिखित जवाब मिलना चाहिए। आंदोलन से जुड़े संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समाधान नहीं निकला तो वे आगे भी NHB मुख्यालय और संबंधित कार्यालयों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रख सकते हैं। दूसरी ओर, NHB की आधिकारिक वेबसाइट पर GoC applications की अस्थायी रोक और योजना दिशानिर्देशों में संशोधन संबंधी सूचनाएं उपलब्ध हैं।

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