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CBSE Update: CBSE का बड़ा निर्देश: नाम-जन्मतिथि में गलती हुई तो बढ़ सकती है परेशानी, 9वीं से 12वीं तक कई बार होगा वेरिफिकेशन
CBSE का बड़ा निर्देश: नाम-जन्मतिथि में गलती हुई तो बढ़ सकती है परेशानी, 9वीं से 12वीं तक कई बार होगा वेरिफिकेशन
CBSE Update: हिसार/संदीप सिंहमार। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सभी संबद्ध स्कूलों को छात्रों की व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी को लेकर जरूरी निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने कहा है कि छात्रों के नाम, जन्मतिथि और अन्य डेमोग्राफिक डिटेल्स रिकॉर्ड में 100 फीसदी सही होनी चाहिए। खास तौर पर कक्षा 10वीं और 12वीं के बाद जारी होने वाली मार्कशीट और अन्य दस्तावेजों में किसी तरह की गलती न रहे, इसके लिए स्कूलों और अभिभावकों को अलग-अलग चरणों में जानकारी जांचने का मौका दिया जाता है।
CBSE के अनुसार, कक्षा 9वीं से 12वीं तक रजिस्ट्रेशन से लेकर List of Candidates (LOC) और परीक्षा के दौरान जारी होने वाले एडमिट कार्ड तक छात्रों की जानकारी को कई स्तरों पर वेरिफाई किया जाता है। बोर्ड का कहना है कि समय रहते रिकॉर्ड में गलती सुधारने से रिजल्ट जारी होने के बाद करेक्शन रिक्वेस्ट की जरूरत कम होगी।
स्कूल रिकॉर्ड में सबसे पहले सही होनी चाहिए जानकारी
CBSE ने कहा है कि छात्रों की डेमोग्राफिक डिटेल सबसे पहले स्कूल के रिकॉर्ड में सही दर्ज होनी चाहिए। इसमें एडमिशन फॉर्म, स्कॉलर रजिस्टर और एडमिशन-विथड्रॉल रजिस्टर जैसे दस्तावेज शामिल हैं। स्कूल की ओर से जारी किए जाने वाले ट्रांसफर सर्टिफिकेट में भी छात्र का नाम, जन्मतिथि और दूसरी जरूरी जानकारी सही दर्ज होनी चाहिए।
कक्षा 9वीं में रजिस्ट्रेशन के समय स्कूल और अभिभावकों को छात्र की जानकारी को ध्यान से जांचकर उसका सत्यापन करना होता है। रजिस्ट्रेशन के बाद CBSE की ओर से करेक्शन विंडो भी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि रिकॉर्ड में किसी गलती की पहचान होने पर उसमें सुधार किया जा सके।
LOC से पहले एडमिट कार्ड तक कई स्तरों पर जांच
CBSE ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि रजिस्ट्रेशन कार्ड डाउनलोड कराकर छात्रों को उनकी जानकारी जांचने के लिए दिया जाए। कक्षा 10वीं के LOC जमा करने से पहले स्कूल को पूरा डेटा दोबारा चेक करना होगा और अभिभावकों से भी इसकी पुष्टि लेनी होगी।
LOC जमा होने के बाद भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार का मौका उपलब्ध रहता है। वहीं परीक्षा से पहले जारी होने वाले एडमिट कार्ड में दर्ज जानकारी को छात्र, अभिभावक और स्कूल प्रिंसिपल को ध्यान से जांचना होगा। इसके लिए संबंधित पक्षों से जानकारी सही होने की पुष्टि वाला अंडरटेकिंग भी लिया जाता है। CBSE के अनुसार, रिजल्ट जारी होने से पहले भी स्कूल डेमोग्राफिक डिटेल में सुधार के लिए बोर्ड को अनुरोध भेज सकते हैं।
9वीं से 12वीं तक करीब 20 बार जांच का मौका
बोर्ड के मुताबिक, छात्रों की जानकारी जांचने और उसमें सुधार की प्रक्रिया कक्षा 11वीं और 12वीं में भी दोहराई जाती है। इस तरह कक्षा 9वीं से 12वीं तक छात्रों और स्कूलों को करीब 20 बार डेमोग्राफिक डिटेल्स की जांच करने का अवसर मिलता है।
इसके बावजूद CBSE को रिजल्ट जारी होने के बाद बड़ी संख्या में नाम, जन्मतिथि और अन्य व्यक्तिगत जानकारी में सुधार के अनुरोध मिल रहे हैं। बोर्ड ने कहा है कि कई मामलों में स्कूलों की ओर से भेजे गए करेक्शन आवेदन भी अधूरे पाए जाते हैं।
अधूरे डॉक्यूमेंट पर CBSE की सख्ती
CBSE के अनुसार, करेक्शन रिक्वेस्ट में कई तरह की कमियां सामने आती हैं। कुछ मामलों में स्कूल जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराते, जबकि कुछ मामलों में छात्र के पिछले स्कूल से जुड़े प्रमाणित दस्तावेज नहीं दिए जाते।
इसके अलावा कई बार जमा किए गए दस्तावेज साफ दिखाई नहीं देते या उनमें जरूरत से ज्यादा कटिंग होती है। बोर्ड की ओर से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाने के बावजूद कुछ स्कूल समय पर जवाब नहीं देते। इससे करेक्शन रिक्वेस्ट के निपटारे में देरी होती है।
स्कूलों को 100% सही रिकॉर्ड रखने के निर्देश
CBSE ने सभी स्कूलों को छात्रों की डेमोग्राफिक डिटेल का रिकॉर्ड पूरी तरह सही रखने के निर्देश दिए हैं। रजिस्ट्रेशन और LOC के दौरान बोर्ड की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।
स्कूलों के लिए अभिभावकों से छात्रों की जानकारी की पुष्टि लेना भी जरूरी होगा। यदि किसी छात्र की डिटेल में सुधार के लिए CBSE को अनुरोध भेजा जाता है, तो जहां लागू हो वहां छात्र के पिछले स्कूलों के प्रमाणित रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने होंगे।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अधूरे करेक्शन रिक्वेस्ट को खारिज किया जा सकता है। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को नाम, जन्मतिथि और अन्य व्यक्तिगत जानकारी हर स्तर पर ध्यान से जांच लेने की सलाह दी गई है, ताकि भविष्य में मार्कशीट या अन्य दस्तावेजों में सुधार के लिए परेशानी न उठानी पड़े।