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RGHS News: आरजीएचएस में बड़ा बदलाव! प्री-अथराइजेशन से क्लेम 47% घटे
9 अस्पतालों का टीएमएस और 3 डॉक्टरों की डॉक्टर आईडी की गई ब्लॉक
जयपुर (सच कहूँ न्यूज़)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (आरजीएचएस) में पारदर्शिता बढ़ाने और अनावश्यक जांचों पर रोक लगाने के लिए लागू की गई प्री-अथराइजेशन व्यवस्था से क्लेम में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। 15 जुलाई से लागू इस व्यवस्था के तहत ₹2,000 से अधिक की जांचों के लिए प्री-अथराइजेशन अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही संदिग्ध गतिविधियों की डिजिटल मॉनिटरिंग कर अनियमितता पाए जाने पर अस्पतालों और चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा कि आरजीएचएस में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ योजना के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना भी विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रिस्क्रिप्शन, जांच और क्लेम से जुड़ी गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। जहां भी अनियमितता सामने आएगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आरजीएचएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने कहा कि आरजीएचएस में डिजिटल सिस्टम के माध्यम से अस्पतालों और डॉक्टरों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। प्री-अथराइजेशन व्यवस्था से अनावश्यक जांचों और क्लेम पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिली है। संदिग्ध मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अस्पतालों और चिकित्सकों द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जाना जरूरी है।
प्रोजेक्ट अधिकारी, आरजीएचएस, डॉ. निधि पटेल ने बताया कि 15 जुलाई से लागू प्री-अथराइजेशन व्यवस्था के बाद क्लेम में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि मॉनिटरिंग के दौरान ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें प्री-अथराइजेशन से बचने के लिए मरीजों की कई जांचें एक ही दिन कराने के बजाय अलग-अलग दिनों में लिखी जा रही थीं। कुछ मामलों में तीन दिन की अवधि के भीतर अलग-अलग दिनों पर जांचों के लिए मरीजों को बार-बार अस्पताल बुलाया गया। इस तरह मरीजों को एक ही सप्ताह में दो-तीन बार अस्पताल आना पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि ₹2,000 से अधिक की जांचों को प्री-अथराइजेशन के दायरे से बाहर रखने के लिए जांचों को अलग-अलग दिनों में करवाने की ऐसी गतिविधियों की डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से पहचान की जा रही है। इससे मरीजों को अनावश्यक परेशानी होती है और योजना की निर्धारित प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
इसी क्रम में जांच के आधार पर 9 अस्पतालों का टीएमएस तथा 3 डॉक्टरों की डॉक्टर आईडी ब्लॉक की गई है। कोटा के दो अस्पतालों का टीएमएस ब्लॉक किया गया है। दोनों मामलों में एक ही चिकित्सक के एक ही दिन दोनों अस्पतालों में काम करने की बात सामने आई। इसी मामले में डॉक्टर की आईडी भी ब्लॉक की गई है। अलवर के एक अस्पताल में एक डॉक्टर के नाम से लिखे गए प्रिस्क्रिप्शन में अलग-अलग हैंडराइटिंग और सिग्नेचर पाए गए। अलवर के एक अन्य अस्पताल में कई ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन में डॉक्टर की सील और सिग्नेचर का एक जैसा पैटर्न पाया गया। वहीं जोधपुर के अस्पताल में एक चिकित्सक के नाम से दो अलग-अलग हैंडराइटिंग और दो अलग सिग्नेचर पैटर्न सामने आए।
दौसा में एक अस्पताल द्वारा पर्याप्त क्लिनिकल फाइंडिंग और जस्टिफिकेशन के बिना जांचें लिखने तथा जरूरत से ज्यादा जांचों की सलाह देने का मामला सामने आया। दौसा में ही अन्य अस्पताल में डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन के सिग्नेचर और मैनुअल प्रिस्क्रिप्शन में अंतर सहित अन्य अनियमितताएं पाई गईं। अलवर के एक अस्पताल में करीब 65 मामलों में पॉलीइथिलीन ग्लाइकोल लिखे जाने तथा कई मामलों में इसके लिए संबंधित क्लिनिकल इंडिकेशन दर्ज नहीं होने की बात सामने आई। कई मामलों में सीरम आयरन जांच भी बिना स्पष्ट लक्षण, क्लिनिकल फाइंडिंग या डायग्नोसिस के लिखी गई।
बीकानेर के अस्पताल से जुड़े चिकित्सक की डॉक्टर आईडी भी ब्लॉक की गई है। अलग-अलग मरीजों की शिकायतों के बावजूद बार-बार समान जांचें लिखे जाने का मामला सामने आया। जयपुर के अस्पताल से जुड़े डॉक्टर की आईडी अलग हैंडराइटिंग पाए जाने के कारण ब्लॉक की गई है। इसके अलावा उदयपुर के एक अस्पताल का टीएमएस भी विभिन्न मामलों के चलते ब्लॉक किया गया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य आरजीएचएस के तहत उपचार और क्लेम की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना, अनावश्यक जांचों पर रोक लगाना तथा योजना का लाभ लेने वाले मरीजों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।