Rajasthan Tourism Japan: जापान में सजेगा राजस्थान, राजस्थान की नई पहचान की तैयारी

अब जापानी पर्यटकों को लुभाएगा राजस्थान का किला-महल ही नहीं, वन्यजीव और ग्रामीण पर्यटन भी

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Rajasthan Tourism Japan: जयपुर (सच कहूँ न्यूज़)। राजस्थान अब जापान के पर्यटन बाजार में जयपुर से आगे पूरे राज्य की तस्वीर पेश करने की तैयारी में है। किले-महलों, रेगिस्तान और लोक संस्कृति के साथ वन्यजीव, हस्तशिल्प, खान-पान, ग्रामीण जीवन और अनुभव आधारित पर्यटन को जापानी पर्यटकों के सामने रखा जाएगा। टोक्यो में गुरुवार से शुरू हो रहे टूरिज्म एक्सपो जापान-2026 में राजस्थान पर्यटन की आधिकारिक भागीदारी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पर्यटन सचिव शुचि त्यागी और पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक (मार्केटिंग) अजय कुमार शर्मा राजस्थान की ओर से एक्सपो में भाग ले रहे हैं। पर्यटन आयुक्त रुक्मणी रियाड़ के अनुसार राजस्थान इस बार जापान में केवल अपने किले और महल नहीं दिखाएगा। राज्य की वन्यजीव पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, अनुभवात्मक पर्यटन, हस्तशिल्प, खान-पान, वेलनेस, डेस्टिनेशन वेडिंग और एमआईसीई की संभावनाओं को भी सामने रखा जाएगा। कोशिश जापानी यात्रियों को राजस्थान के लोकप्रिय स्थलों से आगे नए गंतव्यों और स्थानीय अनुभवों से जोड़ने की है।

जापानी पर्यटकों की बढ़ती संख्या बनी आधारः- जापान को लेकर राजस्थान की उम्मीदों का एक आधार वहां से आने वाले पर्यटकों की बढ़ती संख्या भी है। वर्ष 2025 में करीब 25,250 जापानी पर्यटक राजस्थान पहुंचे। जयपुर लंबे समय से जापानी यात्रियों के राजस्थान भ्रमण का प्रमुख केंद्र रहा है। अब पर्यटन विभाग इस बाजार को उदयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर, रणथंभौर, भरतपुर और शेखावाटी तक ले जाना चाहता है। जापानी यात्रियों की कला, वास्तुकला, शिल्प, प्रकृति और स्थानीय संस्कृति में रुचि को देखते हुए राजस्थान को नए अनुभवों के साथ पेश करने की तैयारी है।

हवेलियां, किले, बावड़ियां, पारंपरिक वस्त्र, हस्तशिल्प और लोक कलाएं इसके प्रमुख हिस्से होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय जीवन, खान-पान और शिल्प से जुड़े अनुभव भी जापानी बाजार के लिए नए उत्पाद के रूप में सामने रखे जाएंगे। विरासत और शिल्प जोड़ सकते हैं दोनों देशों कोः- भारत और जापान के संबंध केवल व्यापार और सहयोग तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं। बौद्ध धर्म ने भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज दोनों देश विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के तहत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना भी इसका हिस्सा है।

गौरतलब है कि राजस्थान और जापान की संस्कृति अलग है, लेकिन दोनों जगह विरासत, पारंपरिक शिल्प, स्थापत्य और स्थानीय परंपराओं का महत्व है। राजस्थान इसी जुड़ाव को पर्यटन के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है औऱ उसका लक्ष्य जापानी पर्यटकों को केवल स्मारक दिखाने के बजाय उन्हें कारीगरों, स्थानीय समुदायों, भोजन और जीवंत परंपराओं से जोड़ना है। मोदी के भारत-जापान विजन से जुड़ी पर्यटन की कड़ी राजस्थान की जापान में यह मौजूदगी ऐसे समय हो रही है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-जापान संबंधों को रणनीतिक सहयोग के साथ संस्कृति, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क के स्तर पर भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

वर्ष 2026 के भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। राजस्थान सरकार भी पर्यटन को निवेश और रोजगार से जोड़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में राज्य की पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में नए पर्यटन क्षेत्रों और पर्यटन सुविधाओं के विकास पर काम किया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी के स्तर पर राजस्थान की वैश्विक पर्यटन ब्रांडिंग को विस्तार देने और नए विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर है। ब्रांडिंग के साथ कारोबार पर भी नजर टूरिज्म एक्सपो जापान राजस्थान के लिए सिर्फ प्रचार का मंच नहीं है। यहां जापानी टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल कंपनियों, मीडिया और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के साथ सीधा संवाद होगा।

राजस्थान के नए पर्यटन उत्पादों और यात्रा मार्गों के साथ कारोबारी साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। पर्यटन आयुक्त रुक्मणी रियाड़ के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में राजस्थान की पहचान मजबूत करने के साथ राज्य के अलग-अलग पर्यटन अनुभवों को सामने लाना प्राथमिकता है। उनका कहना है कि अब कोशिश उन गंतव्यों और अनुभवों को भी विदेशी यात्रियों तक पहुंचाने की है, जो अभी राजस्थान के पारंपरिक पर्यटन सर्किट से बाहर हैं।

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