शिक्षा और रोजगार
Body Donation: आखिरी सफर भी बना गए बेमिसाल, फतेहाबाद के ओम प्रकाश मक्कड़ का शरीर चिकित्सा शोध के लिए दान
अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए परिजनों ने दान किया पार्थिव शरीर
Body Donation: फतेहाबाद, (सच कहूँ/विनोद शर्मा)। मानव जीवन तो सभी जीते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद भी मानवता के काम आने वाले विरले ही होते हैं। डेरा सच्चा सौदा की पावन प्रेरणाओं पर चलते हुए सतीश कॉलोनी, फतेहाबाद निवासी सचखंडवासी प्रेमी ओम प्रकाश मक्कड़ (82) स्व. पुत्र हाकम राम ने अपने जीवनकाल में शरीर दान का संकल्प लिया था। उनके सचखंडवासी होने के बाद परिजनों ने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं पर चलते हुए व उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए उनका पार्थिव शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं शोध कार्यों के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज, उत्तर प्रदेश को दान किया।
शरीर दान की यह सेवा पूरे क्षेत्र के लिए र हजारों की संख्या में साध-संगत और शहरवासी पहुंचे। पवित्र नारा लगाते हुए साध-संगत ने शरीर दानी प्रेमी ओम प्रकाश मक्कड़ को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान जब तक सूरज चांद रहेगा, प्रेमी ओम प्रकाश मक्कड़ तेरा नाम रहेगा के नारों से वातावरण भावुक हो उठा।
शहर के प्रमुख मार्गों से निकली अंतिम यात्रा
शरीरदानी की अंतिम यात्रा सतीश कॉलोनी से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पुराने बस स्टैंड पहुंची। रास्ते में साध-संगत के इस मानवता भलाई के कार्य को सभी ने नमन किया। अंतिम विदाई के दौरान हर आंख नम थी, लेकिन परिजनों के चेहरे पर इस बात का संतोष भी था कि उनके प्रियजन का शरीर मृत्यु के बाद भी चिकित्सा शोध एवं भावी पीढ़ियों के हित में काम आएगा।
पोतियों ने निभाई अंतिम रस्म, दिया बेटा-बेटी एक समान का संदेश
डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे बेटा-बेटी एक समान अभियान की भावना को भी परिवार ने साकार किया। प्रेमी ओम प्रकाश मक्कड़ की पोतियों ने उनकी अर्थी को कंधा दिया। इस पहल ने समाज को यह संदेश दिया कि बेटियां भी बेटों की तरह हर जिम्मेदारी को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ निभा सकती हैं।
भरा-पूरा परिवार छोड़ गए पीछे
प्रेमी ओम प्रकाश मक्कड़ अपने पीछे तीन बेटे चंद्र प्रकाश, शशि प्रकाश और सोम प्रकाश सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके शरीर दान के निर्णय की क्षेत्र में सराहना की जा रही है। साध-संगत ने कहा कि शरीर दान जैसी मानवता भलाई की मुहिम समाज को सेवा, त्याग और परोपकार की राह दिखाती है।