Anmol Vachan: एक ऐसा रस, जिसे जीवात्मा पीती है, तो उसके अंदर लज्जत आनी शुरू होती है!
इन्सान के अंदर भरा है हरिरस: पूज्य गुरु जी
Anmol Vachan: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि मालिक का नाम जब इन्सान लेता है, तो उसके अंदर जो हरिरस, आबोहयात परमपिता परमात्मा का भरा हुआ है, वो जागृत होने लगता है। दूसरे शब्दों में वो जीवात्मा उसको पीने के काबिल बनती चली जाती है। जैसे ही वो हरिरस, आबोहयात जीवात्मा पीती है, तो उसके अंदर एक तरंग की तरह नशा, लज्जत आनी शुरू होती है और इन्सान उस लज्जत, नशे से मालामाल होता जाता है।
पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान प्रभु के नाम का सुमिरन करे, भक्ति-इबादत करे, सबका भला मांगे तो इन्सान के अंदर से वो हरिरस, आबोहयात प्रकट होगा, जिससे इन्सान वो खुशियां प्राप्त कर सकता है, जिसका लिख-बोल कर वर्णन नहीं किया जा सकता, वो खुशियां केवल अनुभव होती हैं। आप जी आगे फरमाते हैं कि इसके लिए जरूरी है कि आप व्यवहारिक तौर पर जीवन में सुमिरन को शामिल करें। चलते, बैठकर, लेटकर, कामधंधा करते हुए नियमानुसार जाप करते रहें। नाम का सुमिरन सब दु:खों को खत्म कर सकता है, नाम का सुमिरन सुखों की खान है। पर सुमिरन तो करना होगा, भक्ति तो करनी होगी। भक्ति के बिना परमानंद नहीं मिलता, इसलिए भक्ति करें, सुमिरन करें, मालिक को मालिक से मांगते हुए आगे बढ़ें तो यकीनन आत्मिक शांति मिलेगी और मालिक की दयामेहर, रहमत के लायक आप बन पाओगे।