संत शेख फरीद
महापुरुष सूखे नारियल की तरह होते हैं और आम आदमी गीले नारियल जैसा। जब तक वह भौतिक वस्तुओं के आकर्षण और रिश्ते-नातों के मोह में बँधा है, कष्ट की नौबत आने पर दुखी होता है, जबकि संत-महात्मा सूखे नारियल की भाँति मोह से परे होते हैं, जैसे खोल से सूखा नारियल।
इन रक्तवीरों ने जरूरतमंद जिंदगियों का सहारा बनकर मनाई अवतार माह की ख़ुशी
भलाई की राह पर कदम बढ़ाते...
गुमनामी के अंधेरे में रोशनी का दीप जला रहे ‘इन्सांं’! लापता प्रमोद को पहुंचाया अपनों के बीच
डेरा सच्चा सौदा के 172 मा...


























