Heart Disease India: कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट नॉर्मल फिर भी आ सकता है हार्ट अटैक! डॉक्टरों ने बताया दिल का छिपा हुआ दुश्मन

Heart Disease India: कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट नॉर्मल फिर भी आ सकता है हार्ट अटैक! डॉक्टरों ने बताया दिल का छिपा हुआ दुश्मन

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Heart Disease India: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती लाइफस्टाइल के कारण दिल की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आमतौर पर लोग अपनी हार्ट हेल्थ का आकलन LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल), HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स के आधार पर करते हैं। यदि ये सभी आंकड़े सामान्य आते हैं तो अधिकांश लोगों को लगता है कि उनका दिल पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां सामान्य कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट होने के बावजूद लोगों को कम उम्र में हार्ट अटैक का सामना करना पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल की बीमारी का खतरा केवल सामान्य लिपिड प्रोफाइल से नहीं आंका जा सकता। कुछ ऐसे छिपे हुए फैक्टर भी हैं जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, लेकिन सामान्य जांच में सामने नहीं आते।

क्या है Lp(a), जिसे माना जा रहा है बड़ा खतरा?

डॉक्टरों के अनुसार Lipoprotein(a) या Lp(a) एक विशेष प्रकार का कोलेस्ट्रॉल कण है। इसकी संरचना LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल जैसी होती है, लेकिन इसमें एक अतिरिक्त प्रोटीन मौजूद होता है। यही अतिरिक्त प्रोटीन इसे अधिक खतरनाक बनाता है।

Lp(a) रक्त वाहिकाओं में चर्बी जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सामान्य लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में इसकी जांच नहीं की जाती। ऐसे में किसी व्यक्ति की कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य दिख सकती है, लेकिन उसके दिल को गंभीर खतरा बना रह सकता है।

कम उम्र में बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले

भारत में डॉक्टरों को एक चिंताजनक ट्रेंड देखने को मिल रहा है। 30 से 40 वर्ष की उम्र के लोग भी हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं, जबकि उनकी सामान्य कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट में कोई बड़ी समस्या नहीं होती।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बढ़ा हुआ Lp(a) स्तर एक प्रमुख कारण हो सकता है। चूंकि यह फैक्टर मुख्य रूप से जेनेटिक्स से प्रभावित होता है, इसलिए खानपान और व्यायाम का इस पर सीमित असर पड़ता है।

भारत में क्यों बढ़ रहा है खतरा?

भारत में समय से पहले दिल की बीमारी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • जेनेटिक प्रवृत्ति
  • डायबिटीज
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • मोटापा
  • शारीरिक गतिविधियों की कमी
  • धूम्रपान और खराब जीवनशैली
  • Lp(a) जैसे छिपे हुए लिपिड मार्कर

यही वजह है कि भारतीयों में हार्ट अटैक का खतरा पश्चिमी देशों की तुलना में 10 से 15 साल पहले तक देखने को मिल रहा है।

किन लोगों को करवाना चाहिए Lp(a) टेस्ट?

डॉक्टर सलाह देते हैं कि जिन लोगों के परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक, स्ट्रोक या दिल की बीमारी का इतिहास रहा हो, उन्हें कम से कम एक बार Lp(a) टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

इसके अलावा निम्न लोगों को भी यह जांच कराने पर विचार करना चाहिए:

  • हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
  • डायबिटीज से पीड़ित लोग
  • मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति
  • बार-बार बढ़ते कोलेस्ट्रॉल वाले मरीज
  • हार्ट डिजीज के हाई रिस्क वाले लोग

कैसे कम किया जा सकता है जोखिम?

हालांकि Lp(a) को सीधे कम करना फिलहाल आसान नहीं माना जाता, लेकिन इसकी जानकारी होने पर अन्य जोखिम कारकों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर LDL कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और जीवनशैली में सुधार पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं।

समय पर जांच और सही जागरूकता ही दिल की गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

Meta Title: कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल होने पर भी आ सकता है हार्ट अटैक! जानिए Lp(a) का छिपा खतरा

Meta Description: क्या आपकी कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट नॉर्मल है? फिर भी हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। जानिए Lp(a) क्या है, क्यों बढ़ रहा है इसका खतरा और किन लोगों को यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

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