CBSE North Zone-2' Swimming Championship: सरसा में स्विमिंग का उत्साह चरम पर!

अभिभावकों और कोचों ने तरणताल की आधुनिक सुविधाओं व उत्कृष्ट प्रबंधन को खूब सराहा

Published On

सरसा, (राजेश बेनीवाल)। एमएसजी भारतीय खेल गांव, डेरा सच्चा सौदा सरसा में आयोजित चार दिवसीय सीबीएसई नॉर्थ जोन-2 बॉयज स्विमिंग चैंपियनशिप के दूसरे दिन रविवार को तरणताल में उत्साह अपने चरम पर पहुंच गया। सुबह होते ही खिलाड़ी अपनी निर्धारित स्पर्धा के लिए जुट गए कोई वार्म अप करने में व्यस्त था तो कोई अपने माता-पिता या कोच से स्वर्णिम छलांग के लिए मार्गदर्शन तो कहीं आशीर्वाद का दौर जारी था।

सुबह से विभिन्न आयु वर्गों की प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। कई मुकाबले इतने कड़े रहे कि विजेता और उपविजेता के बीच अंतर केवल कुछ मिलीसेकेंड का रहा। हर रेस के बाद दर्शकों की तालियों की गूंज और खिलाड़ियों के चेहरे पर जीत का उत्साह पूरे परिसर में खेल भावना का संदेश दे रहा था। दूसरे दिन प्रतियोगिता का दबाव पहले दिन की तुलना में अधिक दिखाई दिया।

अब खिलाड़ियों की नजर केवल अच्छा प्रदर्शन करने पर नहीं, बल्कि अगले चरण में स्थान पक्का करने पर भी थी। यही कारण रहा कि प्रत्येक प्रतिभागी पूरे आत्मविश्वास और रणनीति के साथ पूल में उतरा। कोच भी लगातार खिलाड़ियों की तकनीक, स्पीड और टाइमिंग पर नजर बनाए हुए थे तथा हर रेस के बाद आवश्यक सुझाव देते नजर आए। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों ने बताया कि इस स्तर की प्रतियोगिताएं उनके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं हैं। दूसरे दिन भी आयोजन स्थल पर अनुशासन और व्यवस्थाओं का स्तर आकर्षण का केंद्र बना रहा। सेवादार खिलाड़ियों, अधिकारियों और अभिभावकों की सहायता में लगातार जुटे रहे। चिकित्सा दल, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, भोजन तथा विश्राम स्थलों की व्यवस्थाओं ने बाहर से आए प्रतिभागियों को किसी प्रकार की असुविधा महसूस नहीं होने दी।

अभिभावकों ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला

प्रतियोगिता में अपने बच्चों के साथ पहुंचे राहुल, कर्ण, सुनील रामनिवास सुरभि आदि ने बताया कि अभिभावक पूरे समय खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते रहे।  हर सफल रेस के बाद तालियों से खिलाड़ियों का स्वागत किया गया। कई अभिभावकों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है। वहीं अपने बच्चे के साथ बैठी एक अभिभावक उदास नजर आ रही थी, बात करने पर पता चला कि बच्चे के परिणाम से वे खुश नहीं थीं, उन्हें रियलाईज करवाया गया कि बच्चा है वह कोई मशीन नहीं है जो हर बार आपके मुताबिक ही परिणाम देगा। समझाने के बाद एहसास हुआ और बच्चे को मेहनत के लिए पे्ररित करने लगे।

सभी सुविधाएं मिल रही बैैठे-बैठे

फरीदाबाद से आए प्रतिभागी अकालबीर सिंह भी अपने पिता मंजीत सिंह के साथ आए हुए थे जो कि इससे पहले नेशनल व स्टेट स्पर्धा में भी अपना लोहा मनवा चुके थे जो आज सरसा में भी अपने परिणाम से संतुष्ट नजर आ रहे थे। उन्होेंने बताया कि पहले दिन सभी खिलाड़ी माहौल को समझ रहे थे, लेकिन दूसरे दिन प्रत्येक रेस में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई। मंजीत सिंह ने बताया कि हमें आज दूसरा दिन है लेकिन एक चीज यहां देखने को मिली कि हम बाहर कहीं होते हैं तो सबसे बड़ी बात होती है कि बच्चों को खाना-पीना कैसा मिलेगा क्योंकि यह सबसे खेल पर सबसे अधिक प्रभाव डालते हैं लेकिन हमें यहां पर पानी भी बैठे-बैठे मिल जा रहा है। किसी भी तरह की परेशानी नहीं हुई। 

आधुनिक तकनीक से मिल रहे सटीक परिणाम

स्विमिंग में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए फरीदाबाद से आये हुए कृष मोहिन्द्रा ने बताया कि प्रतियोगिता में उपयोग किए जा रहे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक टाइमिंग सिस्टम ने भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। सटीक परिणाम कुछ ही क्षणों में घोषित होने से प्रतियोगिता पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सटीक नजर आई। कृष के पिता ने बताया कि हमने पहली बार ऐसा सुनियोजित और सेवाभाव वाला क्षेत्र देखा है उत्तर ही नहीं बल्कि दक्षिण भारत की कई जगहों पर गए हैं जिनका नाम बड़ी यूनिवर्सिटीज में गए लेकिन यहां पर आकर जो सुविधाएं मिली हैं वाकई काबिल ए तारीफ है बच्चों व अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है कि वे जहां भी जाएं तो उन्हें मूलभूत सुविधाएं मिले ताकि उनके अभ्यास व परिणाम पर असर न पड़े लेकिन इस स्टेडियम में यहां के गुरुजी ने जो प्रबंध किया है उसका कोई सानी नहीं है। मैं तो इस को रैटिंग दस में से ग्यारह दूंगा...। 

स्विमिंग की हर बड़ी प्रतियोगिता सरसा में हो

अपने दो बच्चों गर्व व युव को लेकर आये कर्मवीर यादव ने कहा कि इससे पहले एक स्पर्धा में पार्टिस्पेट करके तुरंत आ रहे हैं लेकिन वहां के प्रबंधन को लेकर हम यही सोच रहे थे कि अगर ऐसी ही प्रबंधन सरसा में हुई तो मुश्किल हो जाएगी। एक बारगी तो सोचा कि नहीं जाना लेकिन फिर निकल पड़े, हम पहली बार सरसा आए हैं लेकिन यहां तो सब कुछ विपरीत हैै बच्चे हरियाली व प्रदूषण मुक्त खुले क्षेत्र को देखकर खुश नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर पता चला कि पूज्य गुरुजी की प्रेरणा से स्कूल प्रबंधकों ने बेहद अच्छे प्रबंध कर रखे हैं मैंने देश के कई स्थान देखे हैं लेकिन इस तरणताल को देखकर यहां का स्वच्छ जल देखकर अच्छा लगा हम तो यही कहते हैं कि हर प्रतियोगिता सरसा में ही हो ताकि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ बेहतरीन परिणाम मिल सके। Sirsa News

About The Author

Latest News

Related Posts