Kargil Vijay Diwas: शहीदों की अद्वितीय शहादत आने वाली पीढ़ियों को करेगी प्रेरित: भगवंत मान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कारगिल युद्ध के शहीदों को अर्पित की श्रद्धांजलि
चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। Chandigarh News: कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रविवार को देश की संप्रभुता की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि इन जवानों की अद्वितीय वीरता, साहस और अतुलनीय सेवा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। मुख्यमंत्री ने वार मेमोरियल पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों और पूर्व सैनिकों से मुलाकात की, दिव्यांग पूर्व सैनिकों को पाँच दोपहिया वाहन वितरित किए तथा एनसीसी कैडेटों के साथ-साथ महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट और माई भागो आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी इंस्टीट्यूट, मोहाली के कैडेटों को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए जवानों के परिवारों तथा पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए पंजाब सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि शहादत देने वाले जवान केवल एक परिवार के नहीं होते, बल्कि पूरे देश की सबसे बड़ी धरोहर होते हैं। आज हम जिस स्वतंत्रता और सुरक्षा का आनंद ले रहे हैं, वह हमारे वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान का परिणाम है।
उनकी शहादत को याद रखना और उनकी गौरवशाली विरासत का सम्मान करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। जय हिंद। सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारे वीर जवानों का अद्वितीय बलिदान युवा पीढ़ी को देशभक्ति, समर्पण और निस्वार्थ भावना के साथ राष्ट्र सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध के दौरान देश की सेवा करते हुए 527 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिनमें पंजाब के 65 से अधिक वीर सपूत शामिल थे। उनकी वीरता और बलिदान सदैव प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब का इतिहास असंख्य बलिदानों से लिखा गया है और जो समाज अपने इतिहास का सम्मान करता है, वह हमेशा प्रगति करता है। हमारे शहीद केवल अपने परिवारों के नहीं, बल्कि पूरे देश के हैं। उनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता और उनकी गौरवशाली विरासत को संजोना तथा उसका सम्मान करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।