100 बेड के अस्पताल में मात्र 15 डॉक्टर, सीटी स्कैन का स्थायी डॉक्टर नहीं
नारायणगढ़ के नागरिक अस्पताल में खटक रही है डॉक्टरों की कमी
नारायणगढ़ (सच कहूँ/सुरजीत कुराली)। Naraingarh News: नारायणगढ़ क्षेत्र में मिनी पीजीआई के नाम से मशहूर 50 बिस्तर वाला एकमात्र सिविल अस्पताल अब 100 बिस्तर का हो चुका है, परंतु इसमें सुविधाओं का भारी टोटा है। करीब 10 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैले इस 50 बिस्तर वाले अस्पताल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने 29 सितंबर 1974 को किया था, ताकि नारायणगढ़ क्षेत्रवासियों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। परंतु डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाया। मामूली चोट से ग्रस्त मरीज को भी इस अस्पताल से चंडीगढ़, पंचकूला या अंबाला रेफर कर दिया जाता रहा है।
लंबे समय से मरीजों को आ रही ऐसी समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस 50 बिस्तर वाले अस्पताल को 31 करोड़ 12 लाख 18 हजार रुपये की लागत से सौ बिस्तर का बनवा दिया, जिसे ट्रॉमा सेंटर का नाम दिया गया। मुख्यमंत्री ने इसका उद्घाटन 1 जुलाई को किया था। परंतु अब यह इमारत वरिष्ठ डॉक्टरों की बाट जोह रही है और क्षेत्रवासी भी कयास लगाए बैठे हैं कि कब इस अस्पताल में डॉक्टर आएंगे और उन्हें सही इलाज मिल सकेगा।
स्वास्थ्य मंत्री से बात कर जल्द करवाएंगे समस्या का समाधान: विधायक शैली
हल्का विधायक शैली चौधरी के अनुसार, 50 बेड से 100 बेड के हुए नागरिक अस्पताल में मरीजों की संख्या पहले से दोगुनी हो गई है। उन्होंने 16 जुलाई को इस अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। अस्पताल में हर बीमारी से पीड़ित जो मरीज आ रहे हैं जिन्हें मुख्य रूप से गर्भवती महिलाएं शामिल हैं, उनके इलाज के लिए डॉक्टरों की कमी सामने आ रही है। विधायक ने कहा कि उन्होंने एसएमओ प्रवीण कुमार से कहा है कि अस्पताल में जो डॉक्टरों व स्टाफ की कमी है तथा अन्य जो भी दिक्कतें हैं, उन सभी की सूची बनाकर उन्हें दें। इस बारे में वह सरकार व स्वास्थ्य मंत्री से बात करेंगी और जल्द ही सभी समस्याओं का समाधान करवाने का प्रयास करेंगी।
क्या कहते हैं एसएमओ प्रवीण कुमार
एसएमओ प्रवीण कुमार ने बताया कि अस्पताल में 15 ही डॉक्टर हैं, जबकि अस्पताल में आर्थो, सर्जन व अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। सीटी स्कैन के लिए भी डॉक्टर का समय स्थायी नहीं है, जबकि सीटी स्कैन के लिए डॉक्टर हर समय मौजूद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल से जो डॉक्टर व कर्मचारी डेपुटेशन पर किए गए हैं, वे सभी जल्द यहाँ आएं तोमरीजों को असुविधाओं का सामना न करना पड़े।
क्या कहते हैं पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यकारी अभियंता अमित मलिक
पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यकारी अभियंता अमित मलिक के अनुसार, नवनिर्मित ट्रॉमा सेंटर में आने वाले चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के लिए बनाए गए रिहायशी क्वार्टरों सहित पूरे प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस अस्पताल भवन का ग्राउंड फ्लोर 2078.70 वर्ग मीटर, जबकि प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तल प्रत्येक 1901 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में निर्मित किया गया है। इस भवन का कुल कवर्ड एरिया 7781.70 वर्ग मीटर है।
अस्पताल में हर रोज आते हैं हजारों मरीज
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, जब से यह अस्पताल 50 से 100 बेड का हुआ है, तभी से इसमें मरीजों की ओपीडी 800 से 900 तक पहुँच चुकी है, जबकि पहले ओपीडी मात्र 500 ही थी। अस्पताल में हर तरह की बीमारी से पीड़ित मरीज की पर्ची तो काट दी जाती है, परंतु डॉक्टर न होने के चलते मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है तथा बाहर से ही इलाज करवाना पड़ता है। सबसे अधिक समस्या गर्भवती महिलाओं को आती है। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की ओपीडी सबसे अधिक है, परंतु डॉक्टरों की कमी के चलते उन्हें इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।