Body Donation: रामनाथ इन्सां की अंतिम इच्छा हुई पूरी, मेडिकल शिक्षा के लिए समर्पित हुआ पार्थिव शरीर
परिवार में सातवां और गांव मसीतां में हुआ 20वां शरीरदान
डबवाली/गोरीवाला (सरसा), (सच कहूँ/गुरसाहिब इन्सां/सुभाष/अनिल)। अंतिम विदाई भी ऐसी, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और ज्ञान का आधार बने। गांव मसीतां निवासी तथा डेरा सच्चा सौदा के सेवादार किशोर इन्सां एवं अमरजीत कौर इन्सां के पिता 86 वर्षीय रामनाथ इन्सां की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके परिवार ने उनका पार्थिव शरीर मेडिकल शिक्षा एवं शोध कार्य के लिए समर्पित कर दिया। इसके साथ ही रामनाथ इन्सां के परिवार में देहदान की संख्या 7 और गांव मसीतां में 20 पहुंच गई। Sirsa News
मानवता की सेवा के लिए यह परिवार पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुका है। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से किए गए, इस महादान ने एक बार फिर समाज को सेवा, समर्पण और परोपकार का संदेश दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार रामनाथ इन्सां शनिवार 18 जुलाई की रात्रि अपने सांसारिक जीवन की यात्रा पूर्ण कर मालिक की गोद में सचखंड जा विराजे। उन्होंने पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज से नाम-शब्द की अनमोल दात प्राप्त की थी और जीवनभर सेवा, परोपकार तथा मानवता भलाई के कार्यों में सक्रिय रहे।
उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप परिवारजनों ने उनका पार्थिव शरीर गुरुग्राम स्थित श्री गुरु गोबिंद सिंह त्रिशताब्दी मेडिकल कॉलेज को मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए समर्पित कर दिया। रविवार को फूलों से सजी एंबुलेंस में उनके पार्थिव शरीर को गांव से गुरुग्राम के लिए रवाना किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में आस-पास के ब्लॉकों की साध-संगत, सेवादारों और ग्रामीणों ने भावभीनी विदाई दी। इस दौरान देहदानी रामनाथ इन्सां अमर रहें तथा जब तक सूरज-चांद रहेगा, देहदानी रामनाथ इन्सां तेरा नाम रहेगा जैसे गगनभेदी नारों से वातावरण गूंज उठा। Sirsa News
डेरा सच्चा सौदा की बेटा-बेटी एक समान मुहिम के तहत परिवार की बेटियों, पुत्रवधुओं सहित महिलाओं ने भी अर्थी को कंधा देकर समाज में महिला सम्मान और समानता का संदेश दिया। रामनाथ इन्सां अपने पीछे पुत्र किशोर चंद इन्सां व दिशोर चंद इन्सां, पुत्रवधू परमजीत कौर इन्सां, बेटियां बिंदरपाल इन्सां, परमजीत कौर इन्सां एवं अमरजीत इन्सां, दामाद कालाराम इन्सां व प्रेमचंद इन्सां सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। इस अवसर पर ब्लॉक प्रेमी सेवक भिंदर इन्सां, डबवाली ब्लॉक प्रेमी सेवक गोबिंद इन्सां, गांव के प्रेमी सेवक खेमचंद इन्सां, सच्चे नम्र सेवादार अमरजीत इन्सां, जितेंद्रवीर इन्सां, सुरजीत सिंह इन्सां, करनैल सिंह इन्सां, धनराज इन्सां सहित शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादार, साध-संगत, गणमान्य नागरिक, परिजन एवं रिश्तेदार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सेवा और आज्ञाकारिता की मिसाल थे रामनाथ इन्सां
रामनाथ इन्सां के भतीजे लखविंदरजीत सिंह इन्सां ने बताया कि उनके ताया जी अक्सर सेवा से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया करते थे। उन्होंने बताया कि शाह मस्ताना जी धाम में सचखंड हॉल के निर्माण के दौरान पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने साध-संगत को अगले रविवार सेवा में अपने साथ बठल और कस्सी लाने के वचन फरमाए। निर्धारित दिन अधिकांश सेवादार बिना बठल-कस्सी के पहुंचे, जबकि गांव मसीतां के दो भाई जगन्नाथ इन्सां और रामनाथ इन्सां गुरु आदेश का पालन करते हुए बठल और कस्सी साथ लेकर सेवा में पहुंचे। Sirsa News
जब सेवा की गति धीमी होने का कारण पूछा गया तो भाई मोहन लाल इन्सां ने बताया कि केवल यही दोनों भाई गुरु आदेश के अनुसार आवश्यक सामान साथ लेकर आए हैं। यह सुनकर पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने फरमाया कि सचखंड से आए विशेष फलों के प्रसाद के वास्तविक हकदार यही दोनों सेवादार हैं। इसके बाद विशेष प्रसाद केवल जगन्नाथ इन्सां और रामनाथ इन्सां को ही प्रदान किया गया। यह प्रसंग उनकी आज्ञाकारिता, सेवा भावना और गुरु आदेश के प्रति अटूट समर्पण का जीवंत उदाहरण माना जाता है।
देहदान को बताया महादान
इस अवसर पर गांव के सरपंच जगजीत सिंह तथा जेजेपी नेता सर्वजीत सिंह मसीतां ने संयुक्त रूप से कहा कि रामनाथ इन्सां का परिवार धार्मिक, समाजसेवी और मानवता भलाई कार्यों में सदैव अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि देहदान महादान है, क्योंकि मेडिकल कॉलेजों में दान किए गए पार्थिव शरीरों पर अध्ययन और शोध के माध्यम से भावी चिकित्सक चिकित्सा विज्ञान की बारीकियां सीखते हैं और आगे चलकर समाज की बेहतर सेवा करते हैं। उन्होंने परिवार के इस प्रेरणादायक देहदान की सराहना करते हुए कहा कि यह पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा दी गई मानवता भलाई की शिक्षाओं का ही परिणाम है कि श्रद्धालु ऐसे सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। Sirsa News
