Crown of the Lineage : एक ऐसी मुहिम जिसने पूरे विश्व में बढ़ाया लड़कियों का मान

Published On

अब सही मायने में हुए लड़का-लड़की एक समान, अब लड़की से भी चल रहा वंश

बरनावा (सच कहूँ न्यूज)। ये बेटियां तो बेटियां हैं। अनकही अनसुनी सी कहानियां हैं। ये फूलों से भी नाजुक और मखमल से भी कोमल। ये चुप चुप शोर मचाती घर आंगन को चहकाती ये उस रब्ब की नवाजी मेहरबानियां हैं। ये बेटियां तो बेटियां हैं। रोशन करेगा बेटा एक कुल को, दो दो कुलों की लाज होती हैं ये बेटियां। दोस्तों, कोई नहीं है एक-दुसरे से कम, हीरा है अगर बेटा तो, मोती होती हैं बेटियां, भले ही लाखो कमाते हो, पर माँ-पिता से ज्यादा नहीं, गर भूल जाए बेटा माँ-पिता को, तो बुढ़ापे में सहारा बनती हैं बेटियां।

पूज्य गुरु जी ने अपनी नेक कमाई में से देते हैं चेक

बरनावा आश्रम में ‘कुल का क्राऊन’ मुहिम के तहत शादी करने वाले नवविवाहित दंपत्ति को पूज्य गुरु जी ने अपने नेक व कड़ी मेहनत की कमाई में से 5-5 लाख रुपये की एफडीआर टोकन आॅफ लव के रूप में प्रदान की।

बेटियों के बारे में आमजन में प्रचलित बातों को सुनकर मन को सुकुन तो मिलता है, लेकिन जब इसी बेटी के कंधों के सहारे वंश चलाने की बात की जाए तो यह समाज के गले नहीं उतरती। समाज में अध्यात्म मार्ग से करोड़ों लोगों को जोड़ने वाला डेरा सच्चा सौदा आज बेटियों को सम्मान दिलाने के लिए समाज की प्रचलित मान्यताओं को दकिनार कर नवचेतना का संचार कर रहा है। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने इन बेटियों को वो रूतबा प्रदान किया जो जिस पर आज तक पुरूष वर्ग का आधिपत्य रहा। पूज्य गुरू जी की ही दिखाई नवचेतना का परिणाम था कि आज पुरूष प्रधान समाज ने बेटियों से वंश चलाने की परम्परा को भी स्वीकारा है।

पूज्य गुरु जी ने बख्शा कुल के क्राउन का खिताब

वंश चलाने के लिए आगे आई अपने घर की इकलौती बेटी को पूज्य गुरू जी ने बख्शा कुल के क्राउन का खिताब। पूज्य गुरू जी ने डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत को जिनके घरों में दो बेटे हैं को आह्वान किया कि उनके घर का एक बेटा वंश चलाने वाली बेटी के साथ शादी करके उसके घर जाए और वहां घर जवाई नहीं अपितु बेटा बनकर उस घर की शोभा बने।

पूज्य गुरूजी के आह्वान के साथ ही इकलौती बेटियों के माता-पिता के चेहरों पर खुशी की लालिमा छा गई और वंश खत्म होता देख बोझ लगने वाली वही बेटी फूलों सी कोमल बन गई। बड़े बुजुर्गों से सुना था कि बुढ़ापे का सहारा होती हैं बेटियां, आज वह सच महसूस होने लगा था। सर्वधर्म संगम डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने वर्ष 2013 में शुरू हुई इस मुहिम का नाम दिया गया है। ‘कुल का क्राऊन’ मुहिम के तहत बरनावा आश्रम में 4 कन्या कुल का क्राउन बनकर आगे आई। सखियों साथ नाचती-गाती बारात लेकर आई बेटी को देख हर किसी की आंख नम हुए बिना और पूज्य गुरूजी को नमन् किए बिना रह ना सकी। उस दृश्य को देख सहसा मन में आई पंक्तिया बोल ही उठी:- परिवार का अंश बनकर आती हैं बेटियां, पत्थर ना समझो इन्हें अब वंश चलाती हैं बेटियां।

अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramLinkedIn , YouTube  पर फॉलो करें।

About The Author

Related Posts