Iran Israel War: ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले तेज, कितने दिन टिक पाएगा युद्ध? मिसाइलों से लेकर ड्रोन तक जानिए ईरान की पूरी सैन्य ताकत

ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले तेज, कितने दिन टिक पाएगा युद्ध? मिसाइलों से लेकर ड्रोन तक जानिए ईरान की पूरी सैन्य ताकत

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Iran Israel War Update: अमेरिका ने सीरिया और ईरान के तटीय इलाकों में एक बार फिर हवाई और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य बलों ने रात के समय सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास जैसे इलाकों को निशाना बनाया। इन ताबड़तोड़ हमलों में 19 लोगों की मौत और 68 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो ईरान कितने समय तक अमेरिका और इजराइल जैसी सैन्य ताकतों का सामना कर सकता है? उसकी मिसाइल क्षमता, ड्रोन नेटवर्क, सैन्य बल और भूमिगत ठिकाने इस युद्ध में कितने कारगर साबित हो सकते हैं?

सीधी लड़ाई में कितने दिन टिक सकता है ईरान?

सैन्य विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक, अगर अमेरिका और इजराइल के खिलाफ सीधी और बेहद तीव्र सैन्य भिड़ंत जारी रहती है तो ईरान अपनी मौजूदा सैन्य क्षमता के दम पर करीब 15 से 45 दिनों तक पूरी ताकत के साथ मुकाबला कर सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इसके बाद ईरान की युद्ध क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अगर तेहरान पारंपरिक सीधी लड़ाई के बजाय छिटपुट मिसाइल हमले, ड्रोन अटैक और गुरिल्ला रणनीति अपनाता है, तो वह संघर्ष को कई महीनों तक खींच सकता है और फारस की खाड़ी तथा पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बनाए रख सकता है।

ईरान की सबसे बड़ी ताकत हैं बैलिस्टिक मिसाइलें

ईरान के सैन्य भंडार में बैलिस्टिक मिसाइलों को उसकी सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक ताकतों में गिना जाता है। संघर्ष की शुरुआत में उसके पास करीब 3,000 बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा होने का अनुमान लगाया गया था।

लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद अब करीब 2,500 मिसाइलें और लॉन्चर बचे होने की बात कही जा रही है। ईरान हर महीने लगभग 100 नई मिसाइलों का उत्पादन भी कर रहा है। हालांकि, युद्ध में मिसाइलों के इस्तेमाल की रफ्तार उत्पादन की गति से काफी ज्यादा है। इसके बावजूद उपलब्ध खुफिया आकलनों के अनुसार ईरान अपनी मूल मिसाइल क्षमता का करीब 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखने में सफल रहा है।

भूमिगत सुरंगों में छिपी मिसाइलें बन सकती हैं बड़ी चुनौती

ईरान ने लंबे समय से अपनी सैन्य रणनीति में भूमिगत ठिकानों को अहम भूमिका दी है। मिसाइलों और लॉन्चरों को सुरंगों, भूमिगत अड्डों और तहखानों में सुरक्षित रखने की वजह से दुश्मन के लिए उन्हें पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं है।

बताया जा रहा है कि करीब 2,100 मिसाइलें भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित हैं। इसके अलावा लगभग 60 से 70 प्रतिशत मोबाइल मिसाइल लॉन्चर अभी भी सक्रिय स्थिति में हैं। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्र में मौजूद अन्य रणनीतिक लक्ष्यों के खिलाफ किया जा सकता है।

ड्रोन नेटवर्क ईरान का सबसे सस्ता लेकिन खतरनाक हथियार

मिसाइलों के अलावा ईरान की दूसरी बड़ी ताकत उसका ड्रोन नेटवर्क है। उसके पास शाहेद-136 जैसे हजारों कम लागत वाले आत्मघाती ड्रोन मौजूद बताए जाते हैं।

इन ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत उनकी कम कीमत और बड़ी संख्या है। ऐसे हथियारों के जरिए ईरान महंगे एयर डिफेंस सिस्टम को लगातार व्यस्त रखने और विरोधी देशों के सैन्य ठिकानों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञों के लिए ईरान की सैन्य ताकत का आकलन केवल उसके लड़ाकू विमानों और मिसाइलों की संख्या से करना पर्याप्त नहीं है।

6 लाख सैनिकों की बड़ी सेना, लेकिन तकनीकी चुनौती बरकरार

पारंपरिक सैन्य क्षमता की बात करें तो ईरान के पास करीब 6 लाख सक्रिय सैनिकों की बड़ी सेना है। उसके पास बड़ी संख्या में सैन्य विमान, हेलीकॉप्टर और नौसैनिक संसाधन भी मौजूद हैं।

ईरान के पास कुल करीब 551 सैन्य विमान बताए जाते हैं, जिनमें लगभग 188 फाइटर जेट्स शामिल हैं। इसके अलावा करीब 128 हेलीकॉप्टर और 28 से 30 पनडुब्बियां भी उसके सैन्य बेड़े का हिस्सा हैं। हालांकि, अमेरिका और इजराइल की अत्याधुनिक वायु शक्ति, निगरानी तकनीक, सटीक हथियारों और एयर डिफेंस क्षमता के सामने ईरान के पारंपरिक सैन्य संसाधनों की सीमाएं भी सामने आ सकती हैं।

परमाणु हथियार नहीं, लेकिन यूरेनियम संवर्धन बना बड़ी चिंता

परमाणु हथियारों को लेकर ईरान की स्थिति लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रही है। आधिकारिक तौर पर ईरान के पास परमाणु बम होने की पुष्टि नहीं है।

लेकिन उसका यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम अमेरिका और इजराइल के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चिंताओं में शामिल है। यही वजह है कि ईरान की परमाणु क्षमता और उसके परमाणु ढांचे पर किसी भी संघर्ष में विशेष नजर बनी रहती है।

रूस और चीन से मिलने वाली मदद कितना बदल सकती है युद्ध की तस्वीर?

युद्ध के दौरान सैन्य नुकसान के बावजूद ईरान अपने रक्षा उत्पादन को पूरी तरह ठप नहीं होने दे रहा है। रिपोर्टों में रूस और चीन से अप्रत्यक्ष तकनीकी सहायता तथा कलपुर्जों की आपूर्ति का भी उल्लेख किया जाता है।  ईरान के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि वह कम लागत वाली मिसाइल और ड्रोन तकनीक के जरिए अपने सैन्य संसाधनों की भरपाई करने की कोशिश कर सकता है।

यानी अमेरिका और इजराइल के पास जहां अत्याधुनिक और बेहद महंगे हथियारों की ताकत है, वहीं ईरान बड़ी संख्या में अपेक्षाकृत कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल करके युद्ध की कीमत बढ़ाने की रणनीति अपना सकता है।

सीधी जंग बनाम लंबी लड़ाई की रणनीति

अगर संघर्ष केवल आमने-सामने की पारंपरिक लड़ाई तक सीमित रहता है, तो ईरान के लिए लंबे समय तक अमेरिका और इजराइल का मुकाबला करना बेहद मुश्किल हो सकता है। उसकी मिसाइलों, लॉन्चरों, विमानों और अन्य सैन्य संसाधनों पर लगातार हमले उसकी क्षमता को तेजी से प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन अगर ईरान संघर्ष को मिसाइल हमलों, ड्रोन अटैक, समुद्री दबाव और गुरिल्ला रणनीति में बदल देता है, तो तस्वीर काफी अलग हो सकती है।

ऐसी स्थिति में युद्ध कुछ हफ्तों की सीधी सैन्य भिड़ंत के बजाय कई महीनों तक चलने वाले क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है। यही ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानी जा सकती है।

ईरान की सैन्य ताकत को केवल अमेरिका और इजराइल की तुलना में देखना सही तस्वीर नहीं देता। सीधी और तीव्र लड़ाई में उसके संसाधनों पर दबाव तेजी से बढ़ सकता है, लेकिन बड़ी संख्या में मिसाइलें, हजारों ड्रोन, मोबाइल लॉन्चर, भूमिगत ठिकाने और विशाल सैन्य बल उसे लंबी अवधि तक संघर्ष जारी रखने की क्षमता देते हैं।
इसलिए आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होगा कि ईरान कितने दिनों में युद्ध हार सकता है, बल्कि यह होगा कि वह इस संघर्ष को कितने समय तक महंगी और अस्थिर क्षेत्रीय लड़ाई में बदल सकता है।

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