पश्चिम बंगाल में जबरन वसूली-भ्रष्टाचार के आरोप में तृणमूल कांग्रेस के पार्षद और पूर्व विधायक गिरफ्तार
कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में पुलिस की बड़ी कार्रवाई
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो नेताओं को अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया है। इनमें एक मौजूदा नगर निगम पार्षद और एक पूर्व विधायक शामिल हैं। दोनों पर जबरन वसूली, जमीन से जुड़े विवादों और अन्य गंभीर आरोपों की जांच चल रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के वार्ड संख्या 101 के पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को कथित जबरन वसूली के मामले में हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद जब उन्हें थाने लाया गया, तो वहां मौजूद लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी भी की। पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेजों और शिकायतों की जांच कर रही है।
राजनीतिक सफर और विवाद
बप्पादित्य दासगुप्ता का राजनीतिक सफर भाजपा से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। नगर निगम राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उन्हें पार्टी संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली थीं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में उन पर स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगते रहे हैं, जिनमें कथित आर्थिक अनियमितताओं और निर्माण कार्यों से जुड़े विवाद शामिल हैं।
दूसरे मामले में पश्चिम मिदनापुर जिले की मेदिनीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि उनके खिलाफ जमीन कब्जाने, जबरन वसूली और अन्य मामलों से संबंधित शिकायतें दर्ज थीं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, सुजॉय हाजरा पिछले कुछ समय से जांच एजेंसियों की निगरानी में थे। पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन बाद में उन्हें रेलवे स्टेशन क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।
जांच जारी, पुलिस जुटा रही साक्ष्य
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों मामलों में जांच प्रक्रिया जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी आरोपों और तथ्यों की गहन जांच की जाएगी। राज्य में इन दोनों गिरफ्तारियों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई है।