Wake-Up Stroke Symptoms: सोते समय भी आ सकता है स्ट्रोक! सुबह उठते ही दिखें ये 7 लक्षण तो बिल्कुल न करें नजरअंदाज, जानें क्यों होता है Wake-Up Stroke
सोते समय भी आ सकता है स्ट्रोक! सुबह उठते ही दिखें ये 7 लक्षण तो बिल्कुल न करें नजरअंदाज, जानें क्यों होता है Wake-Up Stroke
Wake-Up Stroke Symptoms: स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें दिमाग तक खून की सप्लाई बाधित हो जाती है या दिमाग की कोई नस फट जाती है। ऐसी स्थिति में ब्रेन सेल्स को नुकसान पहुंचने लगता है। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि स्ट्रोक अचानक जागते समय आता है, लेकिन ऐसा नहीं है। कई बार व्यक्ति रात में बिल्कुल सामान्य हालत में सोता है और सुबह उठने पर उसे शरीर में कुछ असामान्य बदलाव महसूस होते हैं। इसे मेडिकल भाषा में 'वेक-अप स्ट्रोक' (Wake-Up Stroke) कहा जाता है। इसमें स्ट्रोक रात में सोते समय आता है और मरीज को इसका पता सुबह लक्षण दिखाई देने पर चलता है। आइए जानते हैं कि वेक-अप स्ट्रोक क्या है, इसके कारण क्या हैं और सुबह उठने पर कौन से लक्षण दिखाई देते हैं।
क्या होता है वेक-अप स्ट्रोक?
वेक-अप स्ट्रोक भी सामान्य स्ट्रोक की तरह ही होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें स्ट्रोक के लक्षण व्यक्ति को जागने के बाद महसूस होते हैं। दरअसल, जब दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नस में खून का थक्का जम जाता है, तो इसे इस्केमिक स्ट्रोक कहते हैं। वहीं, जब दिमाग की कोई नस फट जाती है और अंदर खून बहने लगता है, तो इसे हेमरेजिक स्ट्रोक कहा जाता है।
दोनों ही स्थितियों में दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। वेक-अप स्ट्रोक में परेशानी यह होती है कि मरीज और उसके परिवार को यह पता नहीं होता कि स्ट्रोक रात में किस समय आया था। ऐसे में इलाज के लिए समय का सही अनुमान लगाना डॉक्टरों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
सोते समय क्यों आता है स्ट्रोक?
स्ट्रोक किसी भी समय आ सकता है। रात में सोते समय भी इसकी आशंका रहती है। इसके पीछे कई स्वास्थ्य संबंधी कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। खासतौर पर कुछ बीमारियां स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देती हैं।
- हाई ब्लड प्रेशर: लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है।
- डायबिटीज: ब्लड शुगर का लंबे समय तक बढ़ा रहना रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है।
- हाई कोलेस्ट्रॉल: नसों में प्लाक जमा होने से खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
- दिल की बीमारी: खासकर एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी समस्या में खून का थक्का बनने और दिमाग तक पहुंचने का खतरा बढ़ता है।
- धूम्रपान: इससे रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।
- मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी: ये भी स्ट्रोक के जोखिम से जुड़े कारक हैं।
सुबह उठते ही दिखाई दें ये 7 लक्षण तो रहें सावधान
वेक-अप स्ट्रोक के लक्षण कई बार सुबह उठते ही दिखाई देने लगते हैं। इन्हें सामान्य कमजोरी, थकान या नींद पूरी न होने का असर समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
1. शरीर के एक तरफ कमजोरी: सुबह उठने पर अचानक हाथ या पैर में कमजोरी महसूस होना स्ट्रोक का प्रमुख संकेत हो सकता है। कई बार व्यक्ति एक तरफ का हाथ या पैर ठीक से नहीं उठा पाता।
2. चेहरा एक तरफ झुकना: अगर मुस्कुराने पर चेहरे का एक हिस्सा नीचे की ओर झुका हुआ दिखाई दे या चेहरे में अचानक कमजोरी महसूस हो, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
3. बोलने में परेशानी: अचानक शब्द बोलने में दिक्कत होना, आवाज साफ नहीं निकलना या बात करते समय जुबान लड़खड़ाना गंभीर लक्षण हैं।
4. दूसरों की बात समझने में परेशानी: कई बार व्यक्ति सुन तो पाता है, लेकिन सामने वाले की बात समझने या सही जवाब देने में परेशानी होती है।
5. अचानक धुंधला दिखाई देना: एक या दोनों आंखों से अचानक धुंधला दिखना, नजर कम होना या दिखाई देने में परेशानी होना भी स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
6. चक्कर आना और संतुलन बिगड़ना: अचानक चक्कर आना, चलते समय लड़खड़ाना या शरीर का संतुलन बनाए रखने में परेशानी होना भी चेतावनी का संकेत है।
7. अचानक तेज सिरदर्द: बिना किसी स्पष्ट वजह के अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना, खासकर उल्टी या चेतना में बदलाव के साथ, ब्रेन हेमरेज का संकेत हो सकता है।
स्ट्रोक आने पर तुरंत क्या करना चाहिए?
अगर सुबह उठने पर किसी व्यक्ति में स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो बिल्कुल भी समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत एंबुलेंस बुलाकर मरीज को अस्पताल पहुंचाना जरूरी है।
- लक्षण दिखाई देने का सही समय नोट करें।
- यह जानकारी डॉक्टर को दें कि मरीज को आखिरी बार कब सामान्य हालत में देखा गया था।
- मरीज को खुद से कोई दवा न दें।
- एस्पिरिन जैसी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न दें, क्योंकि स्ट्रोक ब्रेन में खून का थक्का जमने या नस फटने, दोनों वजहों से हो सकता है।
- मरीज को खाने-पीने के लिए कुछ न दें, क्योंकि स्ट्रोक में निगलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
वेक-अप स्ट्रोक में इलाज कैसे होता है?
वेक-अप स्ट्रोक के मरीजों का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि स्ट्रोक किस प्रकार का है और दिमाग को कितना नुकसान पहुंचा है। अस्पताल में डॉक्टर सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी जांचों की मदद से स्थिति का पता लगाते हैं।
कुछ मरीजों में खून का थक्का हटाने के लिए थ्रोम्बोलाइसिस (Thrombolysis) या मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी (Mechanical Thrombectomy) जैसे उपचार किए जा सकते हैं। मरीज इन उपचारों के लिए योग्य है या नहीं, इसका फैसला डॉक्टर जांच और इमेजिंग रिपोर्ट के आधार पर करते हैं। इसलिए लक्षण दिखने पर अस्पताल पहुंचने में देरी नहीं करनी चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान
वेक-अप स्ट्रोक के मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मरीज को स्ट्रोक आने का सही समय पता नहीं चलता। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि ऐसे मरीजों का इलाज संभव नहीं है। आधुनिक मेडिकल जांच और उपचार की मदद से कई मरीजों को समय पर इलाज मिल सकता है।
अगर सुबह उठते ही शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, चेहरा टेढ़ा होना, बोलने में परेशानी या अचानक नजर कमजोर होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। स्ट्रोक में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और समय पर इलाज मिलने से जान बचाने और स्थायी नुकसान को कम करने की संभावना बढ़ सकती है।
Comments