जब पूज्य गुरू जी का पैगाम पढ़कर सुनाया गया तो साध-संगत का ऐसा था रिएक्ट

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सरसा। सर्वधर्म का सांझा दरबार डेरा सच्चा सौदा में शनिवार को 75वां स्थापना दिवस एवं 16वां जाम-ए-इन्सां दिवस बड़े हर्षोल्लास व धूमधाम से पावन भंडारे के रूप में मनाया गया। इस पावन अवसर पर पूज्य गुरू जी के वचनों को श्रवण करने के लिए करोड़ों की संख्या में साध-संगत ने शिरकत की। ऐसा विश्वास का दरिया बहा कि देखते ही देखते श्रद्धा का समुंद्र बन गया। साध-संगत के अपने सतगुरू के प्रति प्रेम और अटूट विश्वास के आगे डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधकीय कमेटी के सभी इंतजामात छोटे दिखाई दिए।

वैसे तो पूज्य गुरू जी के वचनानुसार वो सतगुरू, अल्लाह, राम, वाहेगुरू, खुदा, गॉड कण-कण, जर्रे-जर्रे में विद्यमान है पर फिर भी साध-संगत की प्यासी निगाहें अपने मुर्शिद के देह रूप में दर्शनों के लिए लालायित थी। हालांकि साध-संगत ने स्क्रीनों के माध्यम से पूज्य गुरू जी के पावन वचनों को श्रवण किया और भंडारे की बेशुमार खुशियों का अहसास किया। इस अवसर पर पूज्य गुरू जी ने साध-संगत के लिए पैगाम स्वरूप 15वीं रूहानी चिट्टी भेजी, जो साध-संगत के समक्ष पढ़कर सुनाई गई। इस अवसर पर साध-संगत की आंखों में विरह के आंसू बहते दिखे, समस्त साध-संगत अपने मुर्शिद, सच्चे सतगुरु द्वारा भेजे पैगाम को सुनकर भाव-विभोर हो उठी।

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