शिक्षा और रोजगार
कोयला कर्मचारियों के पेंशन कोष को 19 हजार करोड़ का घाटा
कर्मचारियों को पेंशन के पड़ सकते है लाले
नई दिल्ली (एजेंसी)। भारी अनियमितताओं के चलते कोयला उद्योग से जुड़े कर्मचारियों के पेंशन निधि में 19699 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है और स्थिति को जल्द सुधारा नहीं गया तो कर्मचारियों को पेंशन के लाले पड़ जाएंगे। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की संसद में पेश 2016 की रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 1998 से लागू कोयला खान पेंशन योजना के तहत इसके बोर्ड को हर तीसरे वर्ष लेखा लिपिकों द्वारा पेंशन निधि की समीक्षा कराना जरूरी है लेकिन कैग ने अपनी पड़ताल में पाया कि समीक्षा नियमित रूप से नहीं की गई। वर्ष 2001 से 2013 के दौरान मात्र चार बार समीक्षा की गई और उसकी बेहतरी के लिए की गई अहम सिफारिशें लागू नहीं की गई।
कर्मचारियों को उठाना पड़ा वित्तीय नुकसान
पेंशन निधि की ताजा आकलन रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च को उसकी देनदारी 41161 करोड़ रुपये थी। उसकी परिसंपत्तियों का कुल मूल्य 14819 करोड़ रुपये तथा लेकिन चालू अंशदान 6643 करोड़ रुपये था। इस तरह निधि का कुल घाटा 19698.58 करोड़ था। कैग के अनुसार लिपिकों की राय थी कि यदि घाटा इसी तरह जारी रहा तो 16 वर्ष में निधि की राशि समाप्त हो जाएगी और इसमें अंशदान करने वालों को कोई पेंशन नहीं मिलेगी। उनकी रिपोर्ट में पेंशन निधि को जारी रखने के लिए मौजूदा अंशदान की दर 4.91 से बढ़ाकर वेतन का 19.46 प्रतिशत करने की पुरजोर सिफारिश की गई थी लेकिन इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पेंशन निधि में निहायत कमी, भविष्य निधि से पेंशन निधि खाते में गलत तरीके से राशि के हस्तांतरण तथा भविष्य निधि के निवेश के लिए मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन न करने, ब्याज के गलत भुगतान और पिछले करीब सात वर्षों से 1.71 करोड़ रुपये की राशि का पता न लगने जैसी भी अनियमितताएं भी पाईगई हैं, जिससे कर्मचारियों को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।
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