अधिकारों की लड़ाई में उलझी दिल्ली

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी व उपराज्यपाल के बीच पिछले करीब 4 साल से चली अधिकारों की जंग को उच्चतम न्यायालय ने विराम दे दिया था। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दिल्ली की सरकार लोगों द्वारा चुनी गई सरकार है, जिसके अधिकारों पर राज्यपाल कुंडली मार नहीं बैठ सकता। साथ ही सरकार को भी अराजकता न फैलाने के लिए नसीहत दी है।

अब उपराज्यपाल सेवा विभाग के कार्याें में अपना दखल रखने के लिए गृह मंत्रालय के आदेशों का हवाला देकर फिर से नया विवाद छेड़ने के मूड में आ गए। कल तक दिल्ली वासी ही नहीं पूरा देश यही मान रहा था कि उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के मुख्यमंत्री व उपराज्यपाल के अधिकारों को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

परंतु अब गृह मंत्रालय 2015 की अधिसूचना के नाम पर फिर से उपराज्यपाल को सक्रिय कर चुका है। इसमें ऐसा स्पष्ट प्रतीत हो रहा है कि दिल्ली में व केन्द्र में एक ही दल की सरकार होगी तब मुख्यमंत्री की चलेगी अन्यथा उपराज्यपाल ही दिल्ली के मुख्यमंत्री भी हैं। अब जो विवाद शुरु हो रहा है इससे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को अवश्य आघात पहुंचेगा।

तकनीकी पेचों के नाम पर दिल्ली को आधा राज्य नहीं बल्कि अराजक राज्य बनाया गया है। जिस तरह से दिल्ली राज्य अधिनियम की व्याख्या है इसके चलते कभी भी दिल्ली मुख्यमंत्री व उपराज्यपाल के विवादों का अंत होना संभव नहीं है। अधिकारों की लड़ाई में उलझी दिल्ली का हाल कैसे सुधरे किसी के पास कोई जवाब नहीं।

संवैधानिक तौर पर उपराज्यपाल दिल्ली में मंत्री परिषद् के निर्णयों को स्वीकार करेंगे। विवाद की सूरत में उपराज्यपाल मामला राष्टÑपति के पास भेजेंगे, मामला यदि राष्टÑीय स्तर का हो अन्यथा उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के निर्णयों को लागू करेंगे। पुलिस, कानून व्यवस्था व भूमि संबंधी मामलों पर पूर्ण अधिकार केन्द्र सरकार का है।

अभी जो ताजा विवाद बनाया जा रहा है वह सेवा क्षेत्र है, जिसमें प्रशासनिक तबादले अहम कार्य है, यही उपराज्यपाल छोड़ना नहीं चाहते। यहां जब अधिकारों की स्पष्टता उच्चतम न्यायालय ने कर ही दी है तब सेवा विभाग का नियंत्रण बीच में कहां से आ गया? इस बात में कोई दोराय नहीं कि दिल्ली में लोकतंत्र का अधिकारों के नाम पर जमकर मजाक बनाया जा रहा है।

अधिकारों की इस उलझी लड़ाई में दिल्ली की जनता पिस रही है, अफसरशाही बिना काम बैठी बिल्लियों की लड़ाई में से रोटी उठाकर खा रही है। दुनिया में भारतीय लोकतंत्र का विलक्षण नमूना दिल्ली शासन प्रबंध, तौबा।

 

 

 

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