अनिल कुंबले की रूखी विदाई

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भारतीय क्रिकेट के कोच पद से अनिल कुंबले विदा हो गए हैं। यूं तो उनका कार्यकाल 20 जून को खत्म हो गया था, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड फिर भी उन्हे नये कोच के आने तक वेस्टइंडीज के दौरे पर जा रही क्रिकेट के साथ भेज रहा था। इससे एक तरह से बीसीसीआई अनिल कुंबले को सम्मानजनक विदाई देना चाह रहा था, जो कि कुंबले के व्यवहार के चलते संभव नहीं हो सका। क्रिकेट में रूचि रखने वालों का यह मानना भी अब जायज लगता है कि बीसीसीआई में एक धड़ा ऐसा भी था, जो कुंबले को बहुत जल्द कोच पद से हटा हुआ देखना चाह रहा था।

आखिर क्यों भारतीय क्रिकेट बोर्ड पहले बडे सम्मान से पूर्व खिलाड़ियों को कोच पद पर लाता है फिर जल्द ही उनसे पीछा छुड़ाने के बहाने ढूढ़ने लगता है? कपिल देव, मदन लाल, संदीप पाटिल, अजीत वाडेकर, बिश्न सिंह बेदी ये कई ऐसे कोच रहे हैं जिनकी विदाई भी कोई ज्यादा सम्मानजनक नहीं रही। यदि ताजा हालात में कुंबले की बात करें, तब इनके प्रशिक्षण में भारतीय टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया है। टीम इंडिया ने कुंबले की कोचिंग में 17 टैस्ट मैच खेले और 12 जीते हैं करीब चार मैच ड्रा करे हैं। ठीक ऐसे ही वन-डे मैचेज में भी टीम इंडिया ने अच्छा प्रदर्शन किया और कोई भी सीरीज नहीं हारी। टी-20 मैचेज में भी टीम इंडिया ने पांच मैच खेले दो जीत लिए, दो हार गई व एक अनिर्णीत रहा। यदि चैम्पियन ट्रॉफी के हाल के फाईनल मैच की हार को भुला दिया जाए, तब अनिल कुंबले की कोचिगं में दम रहा है।

टीम इंडिया की यदि बात करे तब अनिल कुंबले का उनके साथ मैदान में ‘हैडमास्टर’ की भूमिका में रहना कहीं न कहीं उनकी रूखी विदाई की वजह बनी है। भारतीय क्रिकेट में टीम चयन करने व मैदान पर टीम प्रंबधन में कप्तान की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहती है। अब टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी हैं। जो कि पूर्व के किसी भी कप्तान से क्रिकेट में कमतर नहीं हैं। यहां वह भी अनिल कुंबले के बारे में बीसीसीआई को मैसेज करते हैं कि कुंबले ‘ओवर बियरिंग’ हैं।

टीम इंडिया में कप्तान व कोच का विवाद अकसर बनता ही आया है। लेकिन कई दफा ये बहुत चर्चा में भी रहा है ग्रेग चैपल एंव सौरव गागुंली का मनमुटाव भारतीय क्रिकेट इतिहास की एक अहम घटना बन चुका है। अभी कुंबले व कोहली में वह परिस्थितियां नहीं बनी थी। फिर भी अनिल कुंबले की क्रिकेट से विदाई टीम इंडिया के कोच की कई पुरानी विदाइयों का दोहराव जरूर बन गई है। यहां ऐसा लग रहा है कि भाई, बहुत हुआ! आप जाइए, ताकि हम सांस ले सकें।

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