publicity and democracy

निंदा, प्रचार व भीड़तंत्र बनकर रह गया लोकतंत्र

17 वीं लोकसभा के लिए मतदान के अंतिम पड़ाव के लिए चुनाव प्रचार बंद हो गया है। प्रतिदिन की रैलियों में होती भीड़, रोड शो, वर्कर बैठकें, हंगामा इस बात का सबूत है कि अभी तक लोकतंत्र भीड़तंत्र से अलग नहीं हो सका। लोकतंत्र में लोक शब्द लुप्त होता जा रहा है व पार्टी के […]
सम्पादकीय