आंदोलनरत किसान नहीं मनाएंगे होली

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कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर करेंगे होलिका दहन

झज्जर (सच कहूँ/संजय भाटिया)। किसान आंदोलन के तहत ढांसा बॉर्डर पर चल रहे धरने पर किसानों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि जब तक तीन कृषि कानून रद नहीं होते तब तक किसान होली का पर्व नहीं मनाएंगे। किसानों ने कहा कि रविवार को ढांसा बॉर्डर धरने पर होलिका दहन में कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई जाएंगी।

धरना स्थल पर किसानों ने कृषि कानून की प्रतियां जलाने के लिए और होलिका दहन के लिए किसानों ने होली का डांडा गाड रखा है। किसान नेता वीरपाल, रविन्द्र सिंह ने कहा कि जिस प्रकार बुराई को जलाने के लिए होलिका दहन किया जाता है, उसी तर्ज पर किसान होली के दिन तीन कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर इस कानून का दहन करेंगे।

इसके साथ-साथ किसानों ने होली का त्यौहार नहीं मनाने का भी ऐलान किया। किसान नेता दीपक धनखड़ ने कहा कि लगातार कृषि कानूनों की वापसी को लेकर पूरे हरियाणा प्रदेश और पूरे देश भर में किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन सरकार की मंशा कृषि कानूनों की वापसी को लेकर ठीक नहीं रही है तो इसी को मद्देनजर रखते हुए अब होलिका दहन में किसी कानून की प्रतियां जलाई जाएंगी।

जिससे कि सरकार को एक कड़ा संदेश जाएगा कि किसान किसी भी कीमत पर कृषि कानूनों को स्वीकार नहीं करेगा और आंदोलन को सर्दियों से गर्मियां आ गई है, मगर आंदोलन बिल वापसी तक लगातार मजबूती के साथ जारी रहने वाला है। उन्होंने कहा कि अब तक 300 से ज्यादा किसानों की शहादत हो चुकी है और सरकार ने अभी तक काले कानूनों की वापसी को लेकर कोई भी सकारात्मक पहल नहीं की है और ना ही सरकार ने बातचीत के लिए कोई सुखद माहौल ही बनाया है।

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