Agricultural Training Camp: गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी व तेला से बचाव के विशेषज्ञों ने बताए उपाय

डिंग में आयोजित प्रशिक्षण शिविर आयोजित, आधुनिक कृषि तकनीकों से रूबरू हुए किसान

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Agricultural Training Camp: सरसा, (सच कहूँ न्यूज)। स्थानीय पुरानी अनाज मंडी में किसानों के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज चयन, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देकर फसल उत्पादन बढ़ाने तथा खेती की लागत कम करने के प्रति जागरूक करना था। Agricultural News

प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कपास (नरमा) की फसल में रोग एवं कीट नियंत्रण के वैज्ञानिक उपायों से अवगत कराया और समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम में किसानों को फसल सुरक्षा, उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। 

विशेषज्ञों ने विशेष रूप से कपास की फसल में गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी और तेला जैसे प्रमुख कीटों के प्रकोप की पहचान, समय पर रोकथाम तथा वैज्ञानिक उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किसानों को अनावश्यक कीटनाशकों के प्रयोग से बचते हुए समेकित कीट प्रबंधन अपनाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र, सरसा के वैज्ञानिक डॉ. सतीश सेन, चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड के डॉ. पंकज गिल, सुनील लांबा, डॉ. कुबेर सिंह, मार्केट कमेटी के वाइस चेयरमैन मनोज खुराना तथा सचिव रामजीलाल सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। Agricultural News

मृदा परीक्षण के आधार पर करें उर्वरकों का प्रयोग: डॉ. पंकज गिल

डॉ. पंकज गिल ने किसानों से कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए मृदा परीक्षण के आधार पर ही संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने किसानों को जैविक उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित करते हुए हरी खाद को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हरी खाद के प्रयोग से भूमि की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम होती है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाकर मृदा स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने का आह्वान किया। Agricultural News

नियमित फसल निरीक्षण से कम होगा नुकसान: डॉ. सतीश सेन

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सतीश सेन ने कपास की फसल में आने वाली प्रमुख समस्याओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने गुलाबी सुंडी, नेमाटोड और उखेड़ा रोग की पहचान, रोकथाम तथा वैज्ञानिक उपचार के उपाय बताते हुए समय पर समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि किसान नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करें और आवश्यकता पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श लें, जिससे फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने अपनी-अपनी फसलों से जुड़ी समस्याओं को कृषि विशेषज्ञों के समक्ष रखा और उनका वैज्ञानिक समाधान प्राप्त किया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की। Agricultural News

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