शिक्षा और रोजगार
बेटी के जन्म पर...ढोल की थाप, मिठाइयां और खुशियों की गूंज
पूज्य गुरु जी की बेटी बेटा एक समान मुहिम की चहुंओर सराहना
सिरसा (सच कहूँ न्यूज़)। Sirsa News: किसी घर में बेटी का जन्म हो और वहां मायूसी नहीं, बल्कि ढोल की थाप, मिठाइयों की खुशबू और खुशियों की गूंज सुनाई दे, तो यह सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं होती, बल्कि समाज में बदलती सोच की तस्वीर होती है। और इस सोच को जन्म देने का कार्य किया है डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह ने। हरियाणा के जिला सिरसा के डबवाली क्षेत्र के गांव देसूमलखाना, ब्लॉक श्री जालालआणा साहिब में ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जहां गुरपाल इन्सां के घर बेटी सरगम के जन्म पर परिवार ने पूरे उत्साह के साथ खुशियां मनाईं।
परिवार के लिए सरगम का जन्म किसी साधारण दिन जैसा नहीं था। नन्ही बेटी के घर में आते ही खुशियों का माहौल बन गया। परिवार ने बेटी के जन्म को बोझ या चिंता के रूप में देखने के बजाय उसे उत्सव में बदल दिया। घर के मुख्य द्वार पर नीम बांधी गई, गांव में मिठाइयां बांटी गईं और ढोल की थाप पर परिजनों ने नाच-गाकर अपनी खुशी का इजहार किया। यह दृश्य उस सोच को सामने रखता है जिसमें बेटी के जन्म को भी उतनी ही खुशी और सम्मान के साथ स्वीकार किया जाता है, जितना बेटे के जन्म को।
परिवार बोला, पूज्य गुरु जी ने बदली सोच
इस मौके पर पिता गुरपाल इन्सां, माता सोनी इन्सां, दाता, संतोक सिंह इन्सं, दादी जसविंद्र कौर ने बताया गया कि यह उत्सव पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा चलाई गई बेटा बेटी एक समान मुहिम से मिली प्रेरणा के तहत मनाया गया। परिवार का कहना है कि बेटियों को बेटों के बराबर दर्जा देने और बेटी के जन्म को खुशी के रूप में स्वीकार करने की शिक्षा उन्हें इसी मुहिम से मिली। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों ने कहा कि समाज में बेटियों को समान अधिकार, सम्मान और अवसर मिलना जरूरी है। उनके अनुसार बेटी को जन्म से ही कमतर समझने की सोच को बदलने की जरूरत है और इसकी शुरूआत अपने घर से ही होनी चाहिए।
सरपंच गुरजीत कौर ने की सराहना
बेटी के जन्म पर गांव की सरपंच गुरजीत कौर और पार्षद जसदेव सिंह निक्का, एएनएम कांता रानी ने परिवार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों के जन्म पर खुशी मनाने की परंपरा समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश देती है। उनके अनुसार जब किसी गांव में बेटी के जन्म पर परिवार खुले तौर पर खुशियां मनाता है, मिठाइयां बांटता है और पूरे समाज को अपनी खुशी में शामिल करता है, तो उसका असर दूसरे परिवारों पर भी पड़ सकता है। यह पहल इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि बदलाव केवल भाषणों और नारों से नहीं आता। जब कोई परिवार अपनी सोच को व्यवहार में उतारता है, तो वही बदलाव समाज के सामने दिखाई देने लगता है।