शिक्षा और रोजगार
कैथल जिले के गांव सोंगल में युवा लिख रहे हरियाली की नई कहानी
सिर्फ पौधे लगाए ही नहीं, उनके पेड़ बनाने की जिम्मेदारी भी उठाई
कैथल, (सच कहूँ / कुलदीप नैन) आज के समय में जहां लोग अपने निजी कामों में व्यस्त रहते हैं, वहीं कैथल जिले के गांव सोंगल के कुछ युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। इन युवाओं ने केवल पौधे लगाने का अभियान नहीं चलाया, बल्कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल की जिम्मेदारी भी उठाई है।
गांव के युवाओं का कहना है कि पौधे लगाना आसान है, लेकिन उनकी देखभाल करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ वे सुबह-शाम पौधों को पानी देने, उनकी खुदाई करने और ट्री गार्ड लगाकर उन्हें सुरक्षित रखने का काम कर रहे हैं। ग्रामीणों ने लोगों से अपील की कि जन्मदिन या किसी खास अवसर पर पौधे लगाएं और उनकी जिम्मेदारी भी लें।
उन्होंने कहा कि 100 पौधे लगाने से बेहतर है कि 10 पौधे लगाकर उन्हें पूरी तरह तैयार किया जाए। गौरतलब है कि युवाओ ने गाँव की फिरनी, सडक किनारे, के आगे पौधे लगाए। फिर उनको ट्री गार्ड से सुरक्षा देने का काम किया तालाब, स्कूल, घरो और इसके बाद उनमे नियमित रुप से पानी देने, खुदाई करने का भी काम ये युवा और ग्रामीण मिलकर कर रहे है।

रोज सुबह उठकर करते हैं पौधों की देखभाल :
युवा जीत सिंह ने बताया कि वह सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले पौधों की देखभाल करते हैं। पानी देना, सफाई करना और पौधों को नुकसान से बचाना उनकी रोजाना की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। शुरुआत में काफी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन अब जब पौधे बड़े हो रहे हैं तो मन को बहुत संतुष्टि मिलती है। उनका उद्देश्य है कि गांव में ज्यादा से ज्यादा हरियाली हो और आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा मिल सके।
पेड़ लगाने के साथ बचाना भी जरुरी:
सुरेंद्र सिहाग ने कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पेड़ केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि बारिश और जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पंचायत और ग्रामीणों का मिल रहा सहयोग:
युवाओं ने बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से भी उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है। पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड और अन्य व्यवस्थाओं में पंचायत मदद कर रही है। गांव के युवाओं की इस पहल ने यह संदेश दिया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल अभियान चलाने से नहीं, बल्कि लगातार मेहनत और जिम्मेदारी निभाने से संभव है। सोंगल गांव के युवाओं का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरियाली भरी विरासत तैयार कर रहा है। युवाओं के इस प्रयास से लोगों को प्रदूषण से राहत मिलने लगी है।
600 से ज्यादा पौधे तैयार किए:
ग्रामीण धर्मपाल ने बताया कि युवाओं की मेहनत से गांव में 600 से अधिक पौधे अब बड़े होकर तैयार हो चुके हैं। इन पौधों में पीपल, नीम और अन्य छायादार पेड़ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि गांव के युवा लगातार इस अभियान में जुटे हुए हैं और स्कूलों, सड़कों के किनारे तथा सार्वजनिक स्थानों पर भी पौधे लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाने से पर्यावरण नहीं सुधरेगा, बल्कि उनकी लगातार देखभाल करना जरुरी है। यदि लगाए गए पौधे सुरक्षित रहेंगे तो आने वाली कई पीढ़ियों को इसका लाभ मिलेगा।