हरियाणा की धरती पर हुई वेदों की रचना और सरस्वती का प्रवाह: अमित शाह 

1857 के शहीदों की याद में बना स्मारक राष्ट्र को समर्पित, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया लोकार्पण

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अंबाला, सच कहूँ/संदीप सांतरे। Ambala News: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वीरवार को अंबाला छावनी में ग्रैंड ट्रंक रोड पर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की स्मृति में बने स्मारक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सैनी, हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, कैबिनेट मंत्री महीपाल ढांडा, कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव, हरियाणा विधानसभा स्पीकर हरविंद्र कल्याण, हरियाणा भाजपा की प्रभारी एंव पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, पूर्व विधायक असीम गोयल समेत अन्य नेता व अधिकारी भी मौजूद थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह वहीं धरती है, जहाँ वेदों की रचना हुई और सरस्वती का प्रवाह रहा। राजा नाहर सिंह और राव तुलाराम की वीर परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि छोटा राज्य होने के बावजूद भारतीय सेना में सबसे ज्यादा जवान हरियाणा से आते हैं। 

गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों की पदक तालिका में हरियाणा अव्वल रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश को खाद्यान्न की जरूरत थी, तब यहाँ के किसानों ने अन्न भंडार भर दिए। शाह ने 1857 की क्रांति के नायकों नाना साहेब पेशवा, महारानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, अजीमुल्ला खां, बेगम हजरत महल, अंतिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर और बाबू कुंवर सिंह के पराक्रम को नमन किया। अमित शाह ने कहा कि शहीदों ने अपना सर्वस्व बलिदान किया, तब जाकर हम आज का स्वाभिमानी और स्वतंत्र भारत देख पा रहे हैं। जो देश अपनी स्वतंत्रता की कीमत नहीं समझता और वीरों के बलिदान को स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज नहीं करता, वह देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता।

800 करोड़ रुपये की लगात से बना स्मारक 

बता दें कि करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से 22 एकड़ में बने इस स्मारक में 1857 की क्रांति का इतिहास आधुनिक तकनीक के जरिये प्रस्तुत किया गया है। स्मारक में 1857 की क्रांति का इतिहास आधुनिक तकनीक से प्रस्तुत किया गया है। इसमें 23 गैलरियां, 360 डिग्री प्रोजेक्शन और डिजिटल प्रस्तुतियाँ हैं। परिसर में आॅगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी, सेंसर आधारित इंटरेक्टिव तकनीक का भी उपयोग हुआ है। स्मारक में शुरू में ही अंबाला को दर्शाया गया है। इसके बाद अंग्रेजों के भारत आगमन, उनकी शासन नीतियों, भारतीय सैनिकों में बढ़ते असंतोष, चर्बी वाले कारतूसों के विवाद और क्रांति की तैयारियों की जानकारी दी जाती है। स्मारक में 270 डिग्री प्रोजेक्शन वाला एक एलिवेटर दर्शकों को अगले पड़ाव तक ले जाता है। इसमें करीब 50 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। स्मारक के श्रद्धांजलि क्षेत्र में ऐतिहासिक शोध के आधार पर 7 सौ से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए गए हैं। 

63 मीटर ऊंचा है कमल आकार का टॉवर 

परिसर का प्रमुख आकर्षण 63 मीटर ऊँचा कमल के आकार का मेमोरियल टॉवर है। जानकारी के अनुसार कमल का स्वरूप 1857 की क्रांति में संदेश पहुँचाने की परंपरा से जुड़ा है। स्मारक परिसर में ओपन एयर थिएटर, वाटर स्क्रीन और प्रोजेक्शन मैपिंग के जरिये लाइट, लेजर और साउंड शो प्रस्तुत किए जाएँगे। दर्शकों को स्मारक की सभी गैलरियाँ और प्रस्तुतियाँ देखने में करीब 6 घंटे लग सकते हैं। 

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