Dragon Fruit Farming: फतेहाबाद की इस महिला ने ड्रैगन फ्रूट की खेती से बदली खेती की तस्वीर, सीएम व कृषि मंत्री करेंगे सम्मानित
दैयड़ की सुनीता बरड़वाल ने की 1 एकड़ में लाखों की खेती
Dragon Fruit Farming: भट्टू कला/फतेहाबाद, (सच कहूँ/विनोद कुमार/मनोज सोनी)। राजस्थान सीमा से सटे फतेहाबाद जिले के गांव दैयड़ की प्रगतिशील महिला किसान सुनीता बरड़वाल ने ड्रैगन फ्रूट की उन्नत खेती के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके उल्लेखनीय कार्य को देखते हुए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में आयोजित होने वाले कृषि मेला रबी-2026 में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कृषि मेले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।
सुनीता बरड़वाल को ड्रैगन फ्रूट की खेती के क्षेत्र में किए गए नवाचार और सफल प्रयोग के लिए सम्मानित किया जाएगा। कृषि मेले में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत किस्मों, फसल विविधीकरण, बागवानी और नई कृषि पद्धतियों की जानकारी भी दी जाएगी। विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक किसानों से सीधा संवाद कर उन्हें खेती की नवीन तकनीकों से अवगत कराएंगे।
जानकारी देते हुए किसान ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की 1 एकड़ में फसल लगाने पर 5-6 लाख रुपये खर्च आता है। पौधे लगाने के 1 साल बाद फल आने शुरु होते हैं, लेकिन पहला फाल छोड़ दिया जाता है। फिर दूसरे साल डैÑगन फ्रूट के फल बेचने शुरु किए जाते हैं। इस फसल से हम 40 साल तक लगातार पैदावार ले सकते हैं। डैÑगन फ्रूट को बेचने के लिए खरीददार खुद चलकर आते हैं। और खेत से ही फल पैकिंग करके दे दिया जाता है। साथ ही किसान इसे नजदीक लगती मडी में भी आसानी से बेच सकते हैं।
महिला किसान का प्रयोग दूसरे किसानों के लिए बनेगा प्रेरणा
ड्रैगन फ्रूट को पारंपरिक फसलों के विकल्प के रूप में बढ़ावा देने की दिशा में सुनीता बरड़वाल का प्रयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि किसान नई बागवानी फसलों और तकनीकों को अपनाकर खेती के नए विकल्प तलाश सकते हैं। कृषि मेले में उनका सम्मान महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ आधुनिक और लाभकारी कृषि को बढ़ावा देने का संदेश भी देगा।
रेडियो के माध्यम से गांव-गांव पहुंचेगा ड्रैगन फ्रूट की खेती का ज्ञान
दैयड़ निवासी सुनीता बरड़वाल के पति सुनील बरड़वाल भी ड्रैगन फ्रूट की खेती के अपने व्यावहारिक अनुभव किसानों के साथ साझा कर रहे हैं। अब आकाशवाणी रोहतक के विशेष कार्यक्रम के माध्यम से वे किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती की तकनीक, उत्पादन और बाजार की संभावनाओं की जानकारी देंगे।
आज शाम 6:30 बजे आकाशवाणी रोहतक से होगा प्रसारण
आकाशवाणी रोहतक के विशेष कार्यक्रम में सुनील बरड़वाल किसानों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम का प्रसारण आज 30 सितंबर को शाम 6:30 बजे एफएम रेडियो और मध्यम तरंग 1143 किलोहर्ट्ज के माध्यम से किया जाएगा। इसके जरिए रोहतक, हिसार, कुरुक्षेत्र सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों तक ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़ी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
केरल से पौधे लाकर प्लास्टिक के ड्रम में किया प्रयोग
सुनील बरड़वाल ने बताया कि उन्होंने केरल से ड्रैगन फ्रूट के पौधे मंगवाकर प्लास्टिक के ड्रम में इसकी खेती का प्रयोग किया, जो सफल रहा। इसी प्रयोग के अनुभवों के आधार पर वे किसानों को सीमित स्थान में ड्रैगन फ्रूट की खेती की संभावनाओं के बारे में बताएंगे। कार्यक्रम में मिट्टी, जल निकासी, सिंचाई, खाद प्रबंधन, पौधों को सहारा देने की तकनीक, उत्पादन और बाजार जैसे विषयों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नई बागवानी फसलों और आधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल करनी चाहिए। हालांकि किसी भी नई फसल को बड़े स्तर पर अपनाने से पहले स्थानीय जलवायु, लागत, उत्पादन और बाजार की संभावनाओं का अध्ययन करना जरूरी है।
आकाशवाणी परिसर में किया ड्रैगन फ्रूट का पौधारोपण
कार्यक्रम के दौरान आकाशवाणी रोहतक के स्टूडियो परिसर में ड्रैगन फ्रूट के पौधे का पौधारोपण भी किया गया। इस अवसर पर डॉ. दीपक हुड्डा, सहायक संचालक सहित आकाशवाणी कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। रेडियो कार्यक्रम के माध्यम से किसानों तक पहुंचने वाला यह संवाद ड्रैगन फ्रूट की खेती के नए प्रयोगों और व्यावहारिक अनुभवों को समझने का अवसर देगा।
ड्रैगन फ्रूट की फसल कब शुरू होती है?
उनके अनुसार, पौधे लगाने के करीब एक साल बाद फल आने शुरू होते हैं, जबकि दूसरे साल से फल बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं।
ड्रैगन फ्रूट की खेती में कितना खर्च आता है?
सुनीता बरड़वाल के अनुसार, एक एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की फसल लगाने में करीब 5-6 लाख रुपये का खर्च आता है।