विभागीय लापरवाही के कारण तीन किलोमीटर लंबी पाइपलाइन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त

रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद, जलघर की डिग्गियां भरने के लिए माइनर से डीजल फूंककर उठाना पड़ा पानी

Published On

गोरीवाला (सच कहूँ/अनिल)। एक तरफ जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ गोरीवाला क्षेत्र में विभागीय अनदेखी के चलते रोजाना हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। कालुआना लिंक चैनल से जलघर तक पानी पहुंचाने के लिए बिछाई गई करीब तीन किलोमीटर लंबी पाइपलाइन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। कई स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज होने से पानी रास्ते में ही बह जाता है।

हालात ऐसे हैं कि जलघर की डिग्गियां भरने के लिए विभाग को मुन्नावाली माइनर से पंप लगाकर पानी उठाना पड़ा और इस पर हजारों रुपये का डीजल खर्च करना पड़ा। दूसरी ओर, पाइपलाइन पर गिरे भारी-भरकम पेड़ लंबे समय से हटाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार कालुआना लिंक चैनल से मुन्नावाली गांव के जलघर तक पानी पहुंचाने के लिए करीब तीन किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई थी।

समय के साथ यह पाइपलाइन कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो गई। सड़क किनारे खड़े सूखे पेड़ टूटकर पाइपलाइन पर गिर गए, जिससे कई स्थानों पर पाइप टूट गए। पेड़ लंबे समय से पाइपों पर पड़े हैं, लेकिन वन विभाग और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के बीच समस्या का समाधान नहीं हो पाया। इसका खामियाजा पानी की बबार्दी और जलघर तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

पानी की बबार्दी रोकने के बजाय डीजल खर्च कर करनी पड़ी वैकल्पिक व्यवस्था

पाइपलाइन से पर्याप्त पानी जलघर तक नहीं पहुंचने के कारण विभाग को मुन्नावाली माइनर से पंप लगाकर पानी उठाना पड़ा। इसके लिए डीजल की खपत हुई और विभाग पर अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर क्षतिग्रस्त पाइपलाइन से रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है, वहीं दूसरी ओर जलघर की डिग्गियां भरने के लिए डीजल खर्च कर वैकल्पिक इंतजाम करना पड़ रहा है। यदि समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत कर दी जाती और गिरे हुए पेड़ों को हटा दिया जाता तो पानी की बबार्दी के साथ अतिरिक्त खर्च से भी बचा जा सकता था।

ग्रामीणों ने नई पाइपलाइन बिछाने की मांग उठाई

ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से सड़क किनारे गिरे सूखे पेड़ों को तुरंत हटवाने और पुरानी क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की जगह नई पाइपलाइन बिछाने की मांग की है। उनका कहना है कि पाइपलाइन दुरुस्त होने से पानी की बर्बादी रुकेगी और जलघर तक पर्याप्त पानी पहुंच सकेगा। इससे बार-बार वैकल्पिक व्यवस्था करने और डीजल पर अतिरिक्त खर्च करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

एस्टीमेट अंडर प्रोसेस, चल रहे काम के साथ होगा वितरण का कार्य

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कनिष्ठ अभियंता कुलदीप ने बताया कि पाइपलाइन का एस्टीमेट अंडर प्रोसेस है। गांव में पाइपलाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। प्रयास किया जा रहा है कि इसी कार्य के साथ पाइपलाइन के डिस्ट्रीब्यूशन का काम भी पूरा करवा दिया जाए।

जल्द हटवाएंगे पाइपलाइन पर गिरे पेड़

वन राजिक अधिकारी प्रेम सिहाग ने बताया कि लंबे समय से रोक लगी होने के कारण सूखे पेड़ों को हटाने में देरी हुई है। सड़क किनारे पाइपलाइन पर गिरे पेड़ों को जल्द हटवाकर वन विभाग के डिपो में रखवाया जाएगा।

About The Author

Comments

Post Comment

Related Posts