शिक्षा और रोजगार
CDLU News: सिरसा में सीडीएलयू की 57 एकड़ भूमि बचाने के लिए नगर परिषद चलाएगा व्यापक जन अभियान
जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट में पक्षकार बनकर लड़ेगी कानूनी लड़ाई
सरसा (सच कहूँ न्यूज)। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय की लगभग 57 एकड़ बेशकीमती भूमि को बचाने के लिए नागरिक परिषद सरसा ने तीन प्रमुख उद्देश्यों के साथ व्यापक जन अभियान चलाने का संकल्प लिया है। विश्वविद्यालय का संपूर्ण विकास, भू-माफिया का विनाश और वास्तविक काश्तकारों को न्याय दिलाना इस अभियान की प्राथमिकता होगी। नागरिक परिषद ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय की भूमि को किसी भी कीमत पर कथित भू-माफिया अथवा बिल्डरों के व्यावसायिक हितों की भेंट नहीं चढने दिया जाएगा।
इसके लिए सरकार और प्रशासन से प्रभावी कार्रवाई की मांग करने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर नागरिक परिषद स्वयं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में पक्षकार बनने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाएगी। यह घोषणा नागरिक परिषद सरसा के अध्यक्ष जगदीश चोपड़ा और सचिव सुरेंद्र भाटिया ने बुधवार को सरसा क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की भूमि का संरक्षण केवल जमीन बचाने का सवाल नहीं, बल्कि सरसा और आसपास के जिलों की आने वाली पीढ़ियों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित रखने का अभियान है।
परिषद इस मामले में किसी राजनीतिक दल के विरोध अथवा समर्थन के बजाय विश्वविद्यालय के हित, कानून के शासन और वास्तविक गरीब काश्तकारों के न्यायसंगत अधिकारों को सर्वोपरि रखेगी। इस अवसर पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रघुबीर सिंह खिंडा, कांग्रेस प्रवक्ता आनंद बियानी, आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान प्रेम बजाज, श्याम लाल मेहता, पूर्व रोटरी गवर्नर भूपेश मेहता, डॉ. वेद बैनीवाल, समाजसेवी एवं जल स्टार रमेश गोयल, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रमेश मेहता, प्रदीप मेहता, समाजसेवी रमेश साहुवाला, हरबंस नारंग, भूपेंद्र खट्टर तथा अधिवक्ता कपिल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय की भूमि बचाने के अभियान का समर्थन किया।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. केवी सिंह ने वीडियो कॉल के माध्यम से संबोधित करते हुए नागरिक परिषद के अभियान में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने का भरोसा दिलाया। नागरिक परिषद के अध्यक्ष जगदीश चोपड़ा और सचिव सुरेंद्र भाटिया ने बताया कि विश्वविद्यालय को प्रारंभ में 348 एकड़ 4 कनाल भूमि आवंटित की गई थी, जिसमें से लगभग 135 एकड़ भूमि वापस ली जा चुकी है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के पास करीब 213 एकड़ भूमि बताई जा रही है, जिसमें से 57 एकड़ 4 कनाल 9 मरला भूमि विवादित है।
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