NEET UG 2026: परिवार के विश्वास और हौसले ने दिलाई मंजिल: पिहोवा के वासु ने NEET-UG में ऑल इंडिया 162वीं रैंक हासिल कर रचा इतिहास
99.99 पर्सेंटाइल के साथ पहले ही प्रयास में शानदार सफलता, नीट परीक्षा रद्द होने के झटके के बाद दोबारा मेहनत कर पूरे हरियाणा में दूसरा स्थान हासिल किया।
पिहोवा (सच कहूँ न्यूज़)। Pehowa News: कहते हैं कि जब सपनों को सच करने के लिए परिवार का साथ, आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत का संबल मिल जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। इस बात को सच साबित कर दिखाया है पिहोवा के होनहार छात्र वासु ने, जिन्होंने नीट-यूजी परीक्षा में ऑल इंडिया 162वीं रैंक और 99.99 पर्सेंटाइल हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे पिहोवा और हरियाणा का नाम देशभर में रोशन कर दिया। देशभर के लाखों अभ्यर्थियों के बीच पहले ही प्रयास में मिली यह सफलता वासु की वर्षों की मेहनत, अनुशासित दिनचर्या और अटूट संकल्प का परिणाम है। इससे पहले भी वासु 12वीं की पीसीबी मेडिकल स्ट्रीम में ऑल इंडिया टॉपर रह चुके हैं।
लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन ने उन्हें प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों में विशेष पहचान दिलाई है। वासु के पिता दीपक गर्ग ने बताया कि जब उन्हें यह जानकारी मिली कि नीट परीक्षा पेपर लीक होने के कारण रद्द कर दी गई है, तो पूरे परिवार के साथ-साथ वासु भी काफी निराश और दुखी हो गए थे। कई महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा रद्द होना किसी भी विद्यार्थी के लिए बड़ा मानसिक झटका होता है। लेकिन परिवार ने उस कठिन समय में वासु का मनोबल टूटने नहीं दिया। सभी ने उसे फिर से आत्मविश्वास के साथ तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। दीपक गर्ग ने कहा, "अगर परिवार का साथ, विश्वास और प्रोत्साहन मिले, और खुद में कुछ कर गुजरने का हौसला हो, तो रास्ते चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल जरूर मिलती है। हर सफलता के पीछे सबसे बड़ी ताकत परिवार होता है। नीट परीक्षा रद्द होने के बाद हम सभी निराश जरूर हुए, लेकिन हार नहीं मानी।
वासु ने दोबारा पूरे समर्पण और मेहनत से तैयारी की और पूरे हरियाणा में दूसरा स्थान प्राप्त कर अपना ही नहीं, अपने माता-पिता, परिवार और पिहोवा का नाम भी रोशन किया। हमें अपने बेटे पर गर्व है।" अपनी सफलता पर वासु ने बताया कि बचपन से ही उनका सपना डॉक्टर बनने का था। इस सपने को आकार देने में उनके चाचा डॉ. रवि गर्ग, जो पिहोवा के एक निजी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, और उनकी चाची, जो स्वयं भी डॉक्टर हैं, का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वासु ने कहा कि बचपन से दोनों को मरीजों की सेवा करते देखकर उनके मन में भी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करने की प्रेरणा जगी और तभी उन्होंने मेडिकल क्षेत्र को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। वासु ने बताया कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने नियमित पढ़ाई, समय का सही प्रबंधन और अनुशासन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। तैयारी के दौरान उन्होंने मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी।
जब भी पढ़ाई के बीच थकान महसूस होती, तो कुछ समय खेलकूद या हल्की शारीरिक गतिविधि कर खुद को तरोताजा करते और फिर पूरी ऊर्जा के साथ पढ़ाई में जुट जाते। वासु की यह सफलता केवल एक परीक्षा में मिली उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती, और जब परिवार हर कदम पर साथ खड़ा हो, तो असफलता या कठिनाइयां भी सफलता की सीढ़ियां बन जाती हैं। आज पिहोवा सहित पूरे हरियाणा में वासु की इस उपलब्धि पर गर्व का माहौल है। क्षेत्र के लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। अब वासु का लक्ष्य एक सफल चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करना और अपने माता-पिता के साथ-साथ देश का नाम भी रोशन करना है।