Fatehabad News: धोखे से बेटे-बहू ने हड़पी जमीन, अब कोर्ट ने मां को वापस दिलाई
वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा को लेकर फतेहाबाद जिला उपायुक्त न्यायालय ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला
फतेहाबाद (सच कहूँ/विनोद शर्मा)। बुजुर्ग माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा को लेकर फतेहाबाद जिला उपायुक्त न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 65 वर्षीय विधवा महिला कलावती को उनकी 58 कनाल 5 मरला कृषि भूमि वापस दिला दी। अदालत ने बेटे और बहू के नाम हुई रजिस्ट्री को शून्य घोषित करते हुए भूमि फिर से बुजुर्ग मां के नाम दर्ज करने के आदेश दिए हैं। Fatehabad News
जगजीवनपुरा निवासी कलावती के पति रामकुमार का वर्ष 2015 में निधन हो गया था। इसके बाद वह अपने बेटे विजय कुमार और बहू सुनीता के साथ रहने लगीं। कलावती ने अपनी याचिका में बताया कि बेटे ने मई 2016 में उन्हें भरोसा दिलाया था कि वह जीवनभर उनकी देखभाल करेगा तथा भोजन, दवाइयों और आवास जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाएगा। इसी विश्वास के आधार पर उन्होंने अपनी 58 कनाल 5 मरला कृषि भूमि बेटे के नाम कर दी।
जमीन मिलते ही बदले बेटे के तेवर
याचिका के अनुसार जमीन अपने नाम होते ही बेटे और बहू का व्यवहार बदल गया। कलावती का आरोप है कि उनकी देखभाल बंद कर दी गई, उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई तथा उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया। इसके बाद उन्हें किराये के मकान में रहना पड़ा। मामले में यह भी सामने आया कि बेटे विजय कुमार ने जुलाई 2016 में विवादित भूमि में से 38 कनाल 17 मरला जमीन अपनी पत्नी सुनीता के नाम ट्रांसफर कर दी।
लोअर ट्रिब्यूनल से नहीं मिली पूरी राहत
मामला पहले अधीनस्थ भरण-पोषण अधिकरण के पास पहुंचा, जहां 29 अक्टूबर 2025 को बेटे को मां को 10 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया, लेकिन जमीन की रजिस्ट्री रद्द करने की मांग खारिज कर दी गई। इस फैसले के खिलाफ कलावती ने अपने अधिवक्ता संदीप टांटिया के माध्यम से जिला उपायुक्त एवं अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील दायर की। Fatehabad News
अपीलीय न्यायालय ने पलटा फैसला
जिला उपायुक्त एवं अपीलीय ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष डॉ. विवेक भारती तथा सदस्य एडवोकेट भारत भूषण गर्ग और जगदीश राय शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि बुजुर्ग महिला को अपेक्षित देखभाल और मूलभूत सुविधाएं नहीं दी गईं। न्यायालय ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा 23 का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक देखभाल की शर्त पर अपनी संपत्ति किसी के नाम करता है और वह व्यक्ति उस शर्त का पालन नहीं करता, तो ऐसा हस्तांतरण निरस्त किया जा सकता है। अदालत ने वर्ष 2016 की मूल रजिस्ट्री (वसीका नंबर 1050) और उससे संबंधित इंतकाल को तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए पूरी भूमि कलावती के नाम बहाल करने के आदेश दिए। साथ ही उपमंडल अधिकारी (नागरिक) फतेहाबाद और जिला समाज कल्याण अधिकारी को आदेश के अनुपालन के निर्देश जारी किए गए हैं।
फैसले से मिली नई उम्मीद
फैसले के बाद कलावती ने खुशी जताते हुए कहा कि यह निर्णय उन बुजुर्ग माता-पिता के लिए बड़ी राहत है जो अपने ही बच्चों द्वारा प्रताड़ित किए जाते हैं। उन्होंने अन्य वरिष्ठ नागरिकों से भी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और जरूरत पड़ने पर कानून का सहारा लेने की अपील की। यह फैसला वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और उनकी संपत्ति के दुरुपयोग पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। Fatehabad News