नेत्रदान व शरीरदान कर अमर हो गई माता बिन्द्रा इन्सां

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नोएडा, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस के स्टूडेंट करेंगे पार्थिव शरीर पर रिसर्च

सच कहूँ/गुरभेज सिंह
सरसा। डेरा सच्चा सौदा सरसा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा चलाई गई ‘अमर सेवा’ व नेत्रदान मुहिम के तहत वीरवार को एमएसजी कॉम्पलेक्स, शाह सतनामजी पुरा सरसा निवासी बिन्द्रा इन्सां (82 वर्ष) पत्नी सचखंडवासी मेहता राज किशोर इन्सां का पार्थिव शरीर मेडिकल शोध के लिए दान किया गया। वहीं उनके नेत्रों को सुरक्षित उत्सर्जित कर आई बैंक में डॉनेट किया गया। जो दो अंधेरी जिन्दगी को रोशनी देने का काम करेंगी। शरीरदानी के पुत्र 45 मैंबर भवनेश इन्सां ने बताया कि उनकी माता बिन्द्रा इन्सां ने पूज्य गुरु जी की पावन शिक्षा का अनुसरण करते हुए जीते जी शरीरदान और नेत्रदान का प्रण किया हुआ था।
उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए पार्थिव शरीर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस नोएडा को दान किया गया है, जहां स्टूडेंट मेडिकल शोध कर डॉक्टर बन सकेंगे। बता दें कि माता बिन्द्रा इन्सां अपने पीछे 6 बेटियों व 3 बेटों के साथ एक भरा पूरा परिवार छोड़कर गई हंै।

1991 में पूज्य गुरु जी से प्राप्त की थी नाम की अनमोल दात

सचखंडवासी के पुत्र राकेश इन्सां व लवकेश इन्सां ने बताया कि माता बिन्द्रा इन्सां ने 1991 में में पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंंह जी इन्सां से नाम की अनमोल दात प्राप्त की थी। जिसके बाद से वे मानवता भलाई में तन-मन-धन से जुट गई और डेरा सच्चा सौदा सरसा दरबार में लगातार सेवा कार्य किया। बता दें कि माता बिन्द्रा इन्सां एक नेक दिल व कर्मठ सेवादार थी और शरीरदानी व नेत्रदानी का पूरा परिवार भी हर समय मानवता व इंसानियत की सेवा के लिए तैयार रहता हैं।

बेटियों ने दिया अर्थी को कंधा

पूज्य गुरु जी द्वारा चलाई गई ‘बेटा-बेटी एक समान’ मुहिम के तहत बेटी वीना इन्सां, नरेश इन्सां, दुर्गेश इन्सां, रमेश इन्सां, सुनीता इन्सां व शारू इन्सां ने माता बिन्द्रा इन्सां की अर्थी को कंधा देकर समाज को बेटा-बेटी एक सामान का संदेश दिया। इस मौके पर बेटियों द्वारा कर रस्म अदा की गई। जिसकी समाज के गणमान्यज लोगों ने सराहना। अंतिम यात्रा के दौरान पार्थिक देह को फूलों से सजी एम्बूलेस में विदा किया गया। इससे पूर्व शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर फोर्स विंग के सेवादारों व बड़ी संख्या में साध-संगत ने पावन नारा लगाकर व अरदास बोलकर उन्हें अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित साध-संगत, रिश्तेदारों व अन्य सेवादारों ने शरीदानी अमर रहे के नारे लगाए और उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की।

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