Organic Farming: बैंक की नौकरी छोड़ी, मिट्टी से जोड़ा नाता, 12 एकड़ में कर रहे प्राकृतिक खेती
तीन साल पहले जहरमुक्त खेती का संकल्प लिया, अब एक ही खेत में उगा रहे 12 तरह की फसलें
Natural Farming in Haryana: सरसा(सच कहूँ/सुनील वर्मा) निजी बैंक में शाखा प्रबंधक की नौकरी, सुरक्षित करियर और तय आमदनी..., लेकिन मन खेती की ओर था। खेत में उगने वाले अनाज को जहरमुक्त बनाने और मिट्टी को स्वस्थ रखने का संकल्प लिया तो बंदीप सिंह गिल (बन्नी नंबरदार) ने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया।
खंड ओढ़ां के गांव लकड़ांवाली निवासी बंदीप सिंह ने करीब तीन साल पहले प्राकृतिक खेती शुरू की और आज 12 एकड़ जमीन पर अलग-अलग फसलों के साथ प्राकृतिक खेती की मिसाल कायम कर रहे हैं। नौकरी छोड़ने से पहले भी उन्होंने करीब दो एकड़ में गेहूं का जैविक तरीके से उत्पादन किया था। इसी अनुभव ने उनका भरोसा बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने प्राकृतिक खेती को पूर्णकालिक रूप से अपनाने का निर्णय लिया।

उपयोगी जीवाणुओं से बदली खेत की मिट्टी
प्राकृतिक खेती की शुरूआत में बंदीप सिंह ने नाइट्रोजन स्थिरीकरण और फास्फोरस को घुलनशील बनाने वाले उपयोगी जीवाणुओं के संवर्धन पर काम किया। इनका खेत में प्रयोग करने से मिट्टी में केंचुओं की संख्या बढ़ी और उसकी जैविक गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला। मिट्टी में आए बदलाव ने उन्हें प्राकृतिक खेती के रास्ते पर आगे बढ़ने का हौसला दिया।
एक खेत में कई फसलें, पानी-बिजली का भी इंतजाम
अब 12 एकड़ में मूंग, बाजरा, सरसों, गेहूं, चना, लहसुन, आलू, प्याज, धनिया, मिर्च, सौंफ, अलसी समेत विभिन्न फसलों और औषधीय पौधों की खेती हो रही है। खेत में सौर ऊर्जा की व्यवस्था के साथ जल संरक्षण के लिए तालाब भी बनाया गया है। बंदीप सिंह का मानना है कि खेती केवल उत्पादन का जरिया नहीं, बल्कि मिट्टी, पानी और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी है।