Cotton MSP: नरमा खरीद की रफ्तार तेज से किसानों के चहरे खिले

MSP से 466 रुपये ऊपर मिला भाव

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सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। नरमे की अच्छी पैदावार और मंडियों में मिल रहे बेहतर भाव ने इस बार कपास उत्पादक किसानों को राहत दी है। जिले की मंडियों में कॉटन की आवक और खरीद लगातार रफ्तार पकड़ रही है। पिछले सीजन में इस अवधि तक मंडियों में 1 लाख 66 हजार 414 क्विंटल कॉटन पहुंचा था, जबकि मौजूदा सीजन में अब तक 2 लाख 36 हजार 270 क्विंटल खरीद दर्ज की गई है।

यानी पिछले साल के मुकाबले इस बार करीब 70 हजार क्विंटल अधिक कॉटन की खरीद हो चुकी है। खास बात यह है कि किसानों को निजी खरीद एजेंसियों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी बेहतर भाव मिल रहे हैं। शनिवार को मंडियों में कॉटन का अधिकतम भाव 9,133 रुपए प्रति क्विंटल रहा, जो लॉन्ग स्टेपल कॉटन के घोषित एमएसपी से 466 रुपए अधिक है।

जिले में इस बार करीब 1 लाख 29 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नरमे की बिजाई की गई थी। सरकार ने इस सीजन के लिए लॉन्ग स्टेपल कॉटन का एमएसपी 8,667 रुपए और मीडियम स्टेपल कॉटन का 8,277 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इसके मुकाबले शनिवार को मंडियों में अधिकतम भाव 9,133 रुपए और न्यूनतम भाव 8,400 रुपए प्रति क्विंटल रहा।

इस तरह अधिकतम भाव पर किसानों को लॉन्ग स्टेपल कॉटन के एमएसपी से 466 रुपए और मीडियम स्टेपल के एमएसपी से 856 रुपए प्रति क्विंटल तक अधिक मिल रहे हैं। हालांकि वास्तविक भाव कॉटन की गुणवत्ता और किस्म के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

सरसा मंडी में सबसे ज्यादा खरीद, कालांवाली दूसरे स्थान पर

जिले की मंडियों में कॉटन खरीद के मामले में सरसा मंडी सबसे आगे चल रही है। यहां अब तक 97,724 क्विंटल कॉटन की खरीद हो चुकी है। कालांवाली मंडी 68,595 क्विंटल खरीद के साथ दूसरे स्थान पर है। ऐलनाबाद मंडी में 40,056 क्विंटल, डबवाली में 31,950 क्विंटल और डिंग मंडी में 945 क्विंटल कॉटन की खरीद दर्ज की गई है। जिले में रानियां को छोड़कर सरसा, डबवाली, कालांवाली, ऐलनाबाद और डिंग मंडियों में खरीद प्रक्रिया जारी है। 

सीसीआई की खरीद शुरू होने का इंतजार

मौजूदा सीजन में निजी एजेंसियां किसानों से कॉटन खरीद रही हैं, जबकि सीसीआई की खरीद अभी शुरू नहीं हुई है। किसानों की नजर अब सीसीआई की खरीद पर भी टिकी है। सरकारी खरीद शुरू होने से मंडियों में खरीद व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। फिलहाल बाजार में एमएसपी से ऊपर मिल रहे भाव किसानों के लिए राहत का कारण बने हुए हैं।

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