ये है सरसा जिले का किसान जिसने पराली को बनाया बिजनेस और 400 से अधिक नौजवानों को दे दिया रोजगार

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सरसा सच कहूँ/पवन कुमार। जिले के प्रगतिशील किसान रणजीत सिंह ने पराली को जलाने की बजाय इसे आय और रोजगार का जरिया बना दिया है। उन्होंने वर्ष 2017 में पराली प्रबंधन की शुरूआत की थी और आज वे 10 लाख क्विंटल पराली का प्रबंधन कर 400 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उनकी कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। रणजीत सिंह का कहना है कि अगर किसान सही दिशा में मेहनत करें तो पराली से भी सुनहरा भविष्य बनाया जा सकता है। उन्होंने सरकार की नीतियों और कृषि विभाग के सहयोग से 2019 में पहला बेलर मशीन खरीदा था और तब से वे लगातार पराली को रोजगार और उद्योग से जोड़ रहे हैं। स्नातक पास रणजीत सिंह अब सरसा जिले के कई गांवों से पराली खरीदते हैं। वर्तमान में वे 10 हजार एकड़ क्षेत्र की पराली का उठान कर रहे हैं। इस वर्ष अब तक अढाई लाख क्विंटल से अधिक पराली का सफल प्रबंधन कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास 20 एकड़ अपनी जमीन है और हर साल वे 40 एकड़ धान की बुवाई तथा 30 एकड़ भूमि पराली और उसके उत्पादों को रखने के लिए ठेके पर लेते हैं।

पेलेट बनाकर भेजते हैं पावर प्लांटों में

रणजीत सिंह पराली से तूड़ी नहीं बनाते, बल्कि पराली व अन्य फसली अवशेष से पेलेट तैयार करते हैं। इन पेलेट्स को विभिन्न पावर प्लांटों में ईंधन के रूप में भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि इस काम से न केवल पर्यावरण संरक्षण हो रहा है, बल्कि ग्रामीण युवाओं को स्थायी रोजगार भी मिल रहा है। 400 से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले रणजीत सिंह आज जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। उन्होंने कहा कि पराली को जलाना नुकसानदायक है, जबकि उसका सही उपयोग आर्थिक अवसरों के द्वार खोल सकता है।

पराली खेती में मिलाने से बढ़ती है जमीन की उर्वरा शक्ति

फसल अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने व पराली प्रबंधन के लिए ग्रामीण क्षेत्र में विद्यार्थियों व कृषि विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। पराली जलाने से मित्र कीट के नष्ट होने, जमीन की उर्वरा शक्ति घटने व प्रदूषण की वजह से होने वाली परेशानियों को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में गत दिवस ठोबरियां, मोडियाखेड़ा, मिठनपुरा, बुर्जकर्मगढ, रोड़ी, पनिहारी, गंगा, देसूमलकाना, अभोली, रत्ताखेड़ा, गिंदडखेड़ा, सक्ताखेड़ा, सुखेराखेड़ा, मल्लेवाला, अबूतगढ, मल्लेकां, अलीकां व जीवननगर आदि गांवों में स्कूली विद्यार्थियों व विभाग की टीमों ने ग्रामीणों को पराली न जलाने व फसल अवशेष प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया।

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