रेत में दबी उपजाऊ जमीन, पर किसानों का हौसला अडिग

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रेत की निकासी के लिए फिरोजपुर के किसान अपना रहे हैं अलग-अलग उपाय, बुआई में अभी लग सकता है समय

  • गेहूँ बुआई के लिए रेत से दबे खेतों को तैयार कर रहे बाढ़ पीड़ित किसान
  • संस्थाएं और राजनीतिक दल कर रहे बीज वितरण और बुआई में सहयोग

फिरोजपुर (सच कहूँ/जगदीप सिंह)। Firozpur News: अगस्त-सितंबर में आई बाढ़ ने पंजाब के कई हिस्सों में तबाही मचाई। बाढ़ से प्रभावित किसान आज भी नुकसान की भरपाई में जुटे हुए हैं। कई खेतों में फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं, जिससे इन परिवारों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा। भारी मात्रा में आई रेत ने खेतों को इस कदर ढक दिया है कि अब रबी की फसल की बुआई भी मुश्किल हो गई है। किसानों की आमदनी का एकमात्र स्रोत उनके खेत हैं, जो अब कई फुट रेत के नीचे दबे हुए हैं। किसान दिन-रात रेत हटाने में लगे हैं ताकि समय रहते गेहूं की बुआई की जा सके। लेकिन हालात ऐसे हैं कि जितनी रेत खेतों में जमा है, उसे हटाने में एक से दो महीने से भी अधिक समय लग सकता है।

रेत की गहराई के अनुसार हो रहा काम: बाढ़ पीड़ित किसान गुरदीप सिंह निवासी जल्लोके ने बताया कि कुछ खेतों में एक फुट, तो कुछ में पांच फुट तक रेत जमा है। खेतों को तैयार करने में रेत की मात्रा के अनुसार ही समय लग रहा है। जिन खेतों में कम रेत है, वहां उसे मिट्टी में मिलाकर खेत तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन वे पहले जैसे उपजाऊ नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे खेतों में गेहूं की पैदावार बहुत कम होने की संभावना है।

मिट्टी और रेत के मिश्रण से खेत बना रहे बुआई योग्य | Firozpur News

कई खेतों में रेत में मिट्टी मिली होने के कारण वह रेत कोई खरीदने को तैयार नहीं है। ऐसे में ट्रैक्टरों से रेत के टिब्बे बनाए जा रहे हैं। जिन खेतों में रेत मध्यम मात्रा में है, वहां झरियां लगाकर नीचे से मिट्टी निकाली जा रही है और खाली जगह में रेत भरकर ऊपर मिट्टी डालकर खेत को गेहूं की बुआई योग्य बनाया जा रहा है। जिन खेतों में रेत अधिक मात्रा में है, वहां से उपयोगी रेत निकाली जा रही है और जेसीबी मशीनों से बड़े स्तर पर रेत हटाने का काम चल रहा है। संस्थाओं से मिल रहा डीजल: गुरदीप सिंह ने बताया कि कुछ संस्थाएं रेत हटाने के लिए डीजल उपलब्ध करवा रही हैं, लेकिन फिर भी रेत की निकासी में काफी खर्च आ रहा है। गेहूं की बुआई का समय नजदीक है, लेकिन रेत हटाने में अभी और समय लग सकता है।

रेत बेचने का नहीं कोई साधन

गुरदीप सिंह ने बताया कि यहां से रेत ट्रालियों में भरकर अलग-अलग जिलों में भेजी जा रही है। जब उनसे रेत बेचने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ट्राली और जेसीबी वालों को भराई दी जाती है। खुद रेत बेचने के लिए उनके पास न तो कोई साधन है और न ही कोई फर्म। उनके अनुसार, यदि कोई रेत ले जाए तो यही बहुत है ताकि वे अपने खेतों को फिर से उपजाऊ बना सकें और परिवार का पालन-पोषण कर सकें। Firozpur News

संस्थाएं और कई दलों के नेता कर रहे हैं बीज वितरण

बाढ़ के बाद कई संस्थाएं बाढ़ पीड़ितों के लिए सहारा बनी हुई हैं। खेतों को फिर से उपजाऊ बनाने का बीड़ा उठाते हुए कई संस्थाएं, राजनीतिक दलों के नेता और किसान संगठन अब गेहूं की बुआई के समय किसानों को बीज और खाद उपलब्ध करवा रहे हैं। वे अपनी मशीनरी से खुद खेतों में बुआई कर रहे हैं, जिससे ये संस्थाएं बाढ़ पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण बन गई हैं।

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