Rice Pest Control: धान-बासमती में कीटों का बढ़ रहा खतरा! पत्ती लपेट सुंडी और तेले से फसल बचाने के आसान उपाय

पीएयू विशेषज्ञों ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी, सही कीट पहचान और जरूरत के अनुसार ही कीटनाशक इस्तेमाल करने की सलाह दी

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लुधियाना (सच कहूँ न्यूज़)। धान और बासमती की फसल में इस समय कीटों की नियमित निगरानी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को विशेष रूप से पत्ती लपेट सुंडी और रस चूसने वाले तेले के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि खेत में कीटों की वास्तविक स्थिति का पता लगाए बिना कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग नहीं करना चाहिए। शुरुआती अवस्था में कीटों की पहचान और सही प्रबंधन से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

पत्ती लपेट सुंडी की ऐसे करें पहचान :

पत्ती लपेट सुंडी धान के पत्तों को मोड़कर या लपेटकर उनके भीतर छिप जाती है। यह पत्तियों के हरे भाग को नुकसान पहुंचाती है, जिसके कारण पत्तों पर सफेद या हल्के रंग की धारियां दिखाई देने लगती हैं।प्रकोप बढ़ने पर पत्तियां कमजोर होकर सूख सकती हैं। इसका असर पौधे की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया पर पड़ता है और फसल की सामान्य बढ़वार प्रभावित हो सकती है।किसानों को समय-समय पर पत्तियों को खोलकर जांच करनी चाहिए कि उनके भीतर सुंडी या उसके नुकसान के लक्षण मौजूद हैं या नहीं।

शुरुआती प्रकोप में क्या करें? 

विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती अवस्था में 5 प्रतिशत अजाडिरैक्टिन वाली ईकोटिन 80 मिलीलीटर या 0.15 प्रतिशत अजाडिरैक्टिन वाली अचूक/नीम कवच 1000 मिलीलीटर प्रति एकड़ का उपयोग किया जा सकता है। इन्हें करीब 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। यदि प्रकोप अधिक हो, तो पीएयू की सिफारिशों में कुछ अन्य कीटनाशक विकल्प भी शामिल हैं। इनमें फेम 480 एससी, टाकूमी 20 डब्ल्यूजी, कोराजन 18.5 एससी और मॉर्टर 75 एसजी जैसी दवाएं निर्धारित मात्रा के अनुसार उपयोग की जा सकती हैं। किसानों को स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही उचित विकल्प का चयन करना चाहिए।

तेले के प्रकोप पर रखें विशेष नजर :

धान में चिट्टी पीठ वाला तेला, जिसे व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर भी कहा जाता है, फसल के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। यह कीट पौधे के तनों से रस चूसता है, जिससे पौधे कमजोर होने लगते हैं। अधिक प्रकोप की स्थिति में खेत के कुछ हिस्सों में पौधे तेजी से सूख सकते हैं। इस स्थिति को हॉपर बर्न कहा जाता है। तेले की जांच के लिए किसानों को पौधों के निचले भाग को ध्यान से देखना चाहिए, क्योंकि यह कीट अक्सर पौधे के निचले हिस्से में छिपा रहता है।

तेले की स्थिति में क्या करें?

पीएयू की सिफारिशों के अनुसार प्रकोप की पुष्टि होने पर पेक्सालोन 10 एससी, उलाला 50 डब्ल्यूजी, ओशीन/टोकन/डोमिनेंट 20 एसजी, चेस 50 डब्ल्यूजी, आर्केस्ट्रा 10 एससी, इमेजिन/वायोला 10 एससी और एकालक्स/क्विनगार्ड/क्विनलमास 25 ईसी जैसे विकल्प निर्धारित मात्रा में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। प्रति एकड़ करीब 100 लीटर पानी का उपयोग करते हुए दवा का समान रूप से छिड़काव करने की सलाह दी गई है। हालांकि कीटनाशक के चयन और मात्रा के लिए वर्तमान आधिकारिक सिफारिशों और लेबल निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

नियमित निगरानी से होगा सबसे बड़ा फायदा:

कीट प्रबंधन की शुरुआत दवा से नहीं, बल्कि खेत की सही निगरानी से होती है। हर कुछ दिनों में पौधों के निचले हिस्से, पत्तियों के भीतर और खेत में पानी के आसपास मौजूद पौधों की जांच करनी चाहिए। बासमती किसानों को भी इन कीटों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। शुरुआत में ही लक्षण पहचान लेने से बड़े प्रकोप को रोकने में मदद मिल सकती है और अनावश्यक कीटनाशक छिड़काव से बचा जा सकता है।

पानी का सही प्रबंधन भी जरूरी:

तेले के अधिक प्रकोप वाले खेत में परिस्थितियों के अनुसार कुछ समय के लिए पानी निकालकर खेत को हल्का सूखने देना भी प्रबंधन में सहायक हो सकता है। हालांकि यह फैसला मिट्टी की स्थिति, मौसम और फसल की अवस्था को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए। अत्यधिक समय तक खेत को सूखा रखने से धान की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए जल प्रबंधन में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

मेड़ और नालियों को रखें साफ:

खेत की मेड़ों और पानी की नालियों में उगे खरपतवार कई कीटों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकते हैं। इसलिए खेत के साथ-साथ आसपास की मेड़ों और नालियों की सफाई भी जरूरी है।समय पर खरपतवार हटाने से कीटों को छिपने और बढ़ने की जगह कम मिलती है। यह एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

बिना जांच के न करें छिड़काव:

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि केवल कीट दिखाई देने पर तुरंत कीटनाशक का छिड़काव न करें। पहले कीट की सही पहचान करें और उसके प्रकोप का स्तर जानें।एक ही कीटनाशक का बार-बार उपयोग करने से कीटों में दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने का खतरा रहता है। इसलिए आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार अलग-अलग प्रभाव-प्रणाली वाले अनुमोदित कीटनाशकों का क्रम बदलकर उपयोग करना बेहतर माना जाता है।

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