रिश्वत लेने वाला आयकर अधिकारी दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई 3 साल की कारावास की सजा

रिश्वतखोरी मामले में आयकर अधिकारी को 3 साल की सजा

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अहमदाबाद (एजेंसी)। Ahmedabad News: गुजरात के अहमदाबाद सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को संयुक्त/अतिरिक्त आयकर आयुक्त (लेखा परीक्षा) कार्यालय के आयकर अधिकारी (ओएसडी) जरनैल बी. सिंह को रिश्वत मामले में दोषी ठहराया और तीन साल के कठोर कारावास और 20,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
 
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 22 फरवरी 2013 को इस मामले को इस आरोप पर दर्ज किया था कि आरोपी आयकर अधिकारी ने शिकायतकर्ता से आयकर अधिनियम की धारा 11 और 80जी के तहत 'श्रीलेखा विविधलक्ष्मी चैरिटेबल ट्रस्ट' को छूट देने का प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 10,000 रुपए की रिश्वत की मांग की थी।

सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपी को शिकायतकर्ता से 10,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। आरोपी को 22 फरवरी 2013 को गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई ने इस मामले में 31 अक्टूबर 2013 को आरोपपत्र दाखिल किया। कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई के बाद आरोपी को 21 अगस्त 2026 को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।

इससे पहले सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) विशाखापत्तनम ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ कथित तौर पर 24.81 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में विजयवाड़ा की एक प्राइवेट कंपनी, उसके चार डायरेक्टरों और अज्ञात सरकारी कर्मचारियों व अन्य व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। 

यह एफआईआर 18 अगस्त को सीबीआई एसीबी विशाखापत्तनम में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, जोनल ऑफिस, विजयवाड़ा के असिस्टेंट जनरल मैनेजर चिनारी श्रीकांत पात्रो की लिखित शिकायत पर दर्ज की गई थी। एफआईआर में मेसर्स ओमकारा विजयलक्ष्मी स्ट्रिप्स प्राइवेट लिमिटेड को पहला आरोपी और इसके डायरेक्टर कोटा भानु प्रसाद, कोटा श्रावणी, कोटा पृथ्वी वेंकट तेजा और कोटा राहुल साई बालाजी को दूसरे से पांचवें नंबर का आरोपी बनाया गया है। अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।

एफआईआर के अनुसार, कंपनी 2017 में बनी थी और इलेक्ट्रॉनिक रेजिस्टेंस वेल्डेड (ईआरडब्ल्यू) गैल्वेनाइज्ड पाइप और अन्य स्टील उत्पादों के निर्माण का काम करती थी। एफआईआर में कहा गया है कि 2024 के दौरान कंपनी के डायरेक्टरों ने अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और प्राइवेट व्यक्तियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की सूर्यरावपेटा ब्रांच, विजयवाड़ा से संपर्क किया। उन्होंने गलत फाइनेंशियल स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेज जमा करके करूर वैश्य बैंक से अपना लोन यूनियन बैंक में ट्रांसफर करवाने की कोशिश की।

CBI

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