मानसा में तनावपूर्ण माहौल, जगह-जगह लगे पुलिस के नाके

गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई के लिए डीसी आवास का घेराव

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मानसा, सच कहूँ/सुखजीत मान। Mansa News: मानसा में परविन्द्र सिंह झोटा हत्याकांड का मामला अभी सुलझा नहीं है। वहीं, बीते दिन गाँव भम्मे कलां के एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के कारण माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है। चल रहे संघर्ष को बलपूर्वक खत्म करवाने की आशंकाओं के बीच परविन्द्र सिंह के पिता भीम सिंह ने धरने में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की। इसके बाद गांवों से बड़ी संख्या में लोग और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता मानसा की ओर रवाना हो गए। पुलिस ने संघर्ष में शामिल होने के लिए आ रहे लोगों को जगह-जगह रोकने की कोशिश की और इसके लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन लोगों के रोष के आगे पुलिस के नाके टिक नहीं सके।

कई नाकों पर किसान नेताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई। इस दौरान कुछ लोग घायल भी हो गए। सुबह तिकौणी पर धरने के दौरान स्थिति उस समय काफी तनावपूर्ण हो गई, जब वहाँ से पुलिस की फॉरेंसिक टीम की गाड़ी गुजरने लगी। प्रदर्शनकारी युवकों ने जोरदार विरोध करते हुए गाड़ी को वापस मोड़ दिया। इसके अलावा, लक्खा सिधाना सहित गिरफ्तार किए गए अन्य प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग को लेकर दोपहर बाद मानसा के डिप्टी कमिश्नर के आवास के सामने धरना लगाया गया और जोरदार नारेबाजी की गई। जानकारी के अनुसार, गांव भम्मे कलां के युवक दलजीत सिंह की कल संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिवार को आशंका है कि युवक की मौत नशे के कारण हुई है, जबकि पुलिस इसे हत्या का मामला बता रही है। परिवार ने ग्रामीणों के सहयोग से कल सिरसा-बरनाला सड़क पर धरना लगाया था।

इसके बाद जब मृतक का शव मानसा में परविन्द्र सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर चल रहे संघर्ष में शामिल करने के लिए ले जाया जा रहा था, तो जवाहरके कैंचियां के पास पुलिस ने घेराबंदी कर शव अपने कब्जे में ले लिया और उसे बठिंडा स्थित एम्स अस्पताल पहुंचा दिया। वहाँ पुलिस का कड़ा पहरा है। पुलिस की इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और बढ़ गया। 

वहीं गतदिवस झोटा मामले को लेकर चल रहे संघर्ष स्थल के नजदीक से लक्खा सिधाना को गिरफ्तार कर लिया गया और वहाँ भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इससे यह आशंका पैदा हो गई कि रात के समय प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करके सड़क खाली करवाई जा सकती है। ऐसी खबरें मिलने के बाद गांवों में संदेश भेजे गए कि संघर्ष में बड़ी संख्या में लोग पहुंचें। झोटा के पिता भीम सिंह फौजी ने भी अधिक से अधिक लोगों से धरने में शामिल होने की अपील की। इस अपील पर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां समेत कई अन्य संगठनों ने मोर्चे में पहुंचने का ऐलान किया। बुधवार सुबह जब किसान संगठनों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने मानसा की ओर बढ़ना शुरू किया, तो पुलिस ने शहर की ओर आने वाले सभी रास्ते सील कर दिए।

किसानों के रोष के आगे झुकी पुलिस, रास्ता खोला

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठूके के नेतृत्व में जब सैकड़ों किसान मानसा की ओर बढ़ रहे थे, तो एसएसपी मानसा वैभव चौधरी के नेतृत्व वाली पुलिस टीम ने गांव तामकोट में उन्हें रोकने की कोशिश की। किसानों ने इसका जोरदार विरोध किया। इस नाके पर पुलिस और किसानों के बीच हुई खींचतान के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने एक युवक को डंडों से कई बार मारा। इसके बावजूद स्थिति ऐसी बनी कि किसानों के रोष के आगे पुलिस को पीछे हटना पड़ा। पुलिस मानसा कैंचियां की ओर चल पड़ी और किसान भी उसके पीछे रवाना हो गए।

मानसा कैंचियां पर पुलिस ने पहले से ही बड़ी संख्या में जवान तैनात कर रखे थे। किसान नेता झंडा सिंह जेठूके ने वहाँ तैनात पुलिस अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि किसान शांतिपूर्वक आगे जाएंगे और रास्ता खोल दिया जाए। उन्होंने पुलिस को रास्ता खोलने के लिए दस मिनट का समय दिया। इसके बाद पुलिस ने रास्ता खोल दिया। किसानों की भागीदारी से अब परविन्द्र सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर चल रहे संघर्ष को और मजबूती मिली है। डिप्टी कमिश्नर के आवास के सामने धरना लगाए जाने के कारण वहाँ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इसके चलते इलाके में टकरावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

 

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