शिक्षा और रोजगार
Insaniyat Campaign: डेरा सच्चा सौदा संगरिया के सेवादारों ने ऐसी दिखाई ‘इंसानियत’, परिवार का दूर हो गया अंधेरा
चार माह बाद माँ से मिला रायबरेली का अखिलेश
संगरिया (सच कहूँ/सुरेन्द्र जग्गा) । पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से चलाई जा रही ‘इंसानियत’ मुहिम ने एक बार फिर एक बिछुड़े हुए परिवार की खुशियां लौटा दीं। संगरिया के डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं ने पिछले 4 महीनों से अपने परिवार से दूर होकर भटक रहे उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी 26 वर्षीय बेसहारा और मानसिक रूप से परेशान युवक को न सिर्फ संभाला, बल्कि महज एक दिन में उसके परिजनों को ढूंढकर उसे सुरक्षित सौंप दिया। अपने जिगर के टुकड़े को गले से लगाकर रो पड़ी माँ के आंसुओं ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। Sangaria News
भूख-प्यास से व्याकुल था युवक, मसीहा बनकर पहुंचे सेवादार
जानकारी के अनुसार, श्रीगंगानगर रोड स्थित बुधरवाली कैंटीन के पास एक 26 वर्षीय युवक बेहद दयनीय हालत में लावारिस घूम रहा था। मैले-कुचैले, बदबूदार कपड़ों में लिपटा यह युवक मानसिक रूप से बेहद परेशान था और भूख-प्यास से व्याकुल था। उसकी यह बदहाली देखकर सेवादार भाई कृष्ण डूडी इन्सां और कुलदीप इन्सां का दिल पसीज गया। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना संगरिया के अन्य सेवादारों को दी। मौके पर पहुंचे सेवादारों ने सबसे पहले उसे चाय-पानी पिलाकर उसकी भूख-प्यास शांत की। इसके बाद स्थानीय पुलिस थाने को सूचित कर जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं।
सेवादार उस युवक को एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केंद्र, संगरिया लेकर आए। यहां सेवादारों ने उसे नहलाया-धुलाया, बाल काटे और साफ-सुथरे कपड़े पहनाए। सेवादारों की इस नि:स्वार्थ सेवा और अपनेपन से युवक की मानसिक स्थिति में थोड़ा सुधार आया। जब उसने होश संभाला, तो उसने अपना नाम अखिलेश और घर का पता रायबरेली (उत्तर प्रदेश) बताया। इसके बाद सेवादार भाई सोशल मीडिया के सहारे परिजनों की तलाश में जुट गए और कड़ी मशक्कत के बाद मात्र एक दिन में ही उसके परिवार का पता ढूंढ निकाला। Sangaria News
वीडियो कॉल पर माँ और बेटे का मिलाप, रो पड़ा पूरा परिवार
जब रायबरेली में रह रहे परिजनों को पता चला कि उनका लाडला अखिलेश संगरिया में बिल्कुल सही-सलामत है, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सेवादारों ने जब अखिलेश की माँ से वीडियो कॉल पर बात करवाई, तो 4 महीने बाद अपने खोए हुए बेटे को देखकर माँ के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। खबर मिलते ही अखिलेश का भाई भोला और उसकी माता धनमाता उसे लेने के लिए तुरंत संगरिया के लिए रवाना हो गए।थाना प्रभारी और समाजसेवियों ने की मुक्त कंठ से प्रशंसा
इस भावुक पल के दौरान मौके पर मौजूद पुलिस थाना प्रभारी अमर सिंह, समाजसेवी पार्षद एडवोकेट अनिल भोबिया और अशोक कुमार जैन ने डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाई जा रही ‘इंसानियत’ मुहिम की दिल से तारीफ की। उन्होंने कहा कि किसी बिछड़े हुए को उसके परिजनों से मिलवाना दुनिया का सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है। इन सेवादारों में नि:स्वार्थ सेवा का जो जज्बा है, वह सचमुच काबिले तारीफ और समाज के लिए प्रेरणादायी है। इस सेवा कार्य में मुख्य रूप से शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के जिम्मेवार भाई लालचंद इन्सां, महेश गोयल इन्सां, अमरा राम इन्सां, सुखदेव इन्सां, पवन इन्सां, सुभाष गोदारा इन्सां, ब्लॉक प्रेमी सेवक लवली गर्ग इन्सां, तारा चंद, विष्णु मिगलानी व सुरेन्द्र जग्गा इन्सां का सहयोग रहा।
संगरिया पहुंचकर जब माँ ने अपने खोए हुए बेटे को गले से लगाया, तो सफर की सारी थकान आंसुओं के रास्ते बह गई। माँ बार-बार रोते हुए सेवादारों और पूज्य गुरु जी का धन्यवाद कर रही थी, जिनकी बदौलत उनका बेटा आज उनकी आचंल में था। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए अखिलेश को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। Sangaria News
