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महात्मा गांधी अस्पताल में युवा महिला को जन्मजात रोग से मिली राहत
वाल्व रिपेयर सर्जरी से बिना वाल्व बदले जन्मजात रोग का उपचार
जयपुर। महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर के पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जन ने जन्म के समय से वाल्व की खराबी से पीड़ित एक 30 वर्षीय महिला में वाल्व रिपेयर (Valve Repair Surgery) करने में सफलता हासिल की है। महिला को एबस्टिन एनोमली नामक बीमारी थी। जिसका सफल उपचार करते हुए अत्यंत जटिल कॉन रिपेयर (Cone Repair) सर्जरी की गई। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि मरीज के दिल में ट्राइकस्पिड वाल्व ठीक कर दिया गया और उसे कृत्रिम वाल्व लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। Jaipur News
महात्मा गांधी अस्पताल के पीडियाट्रिक कार्डियक साइंसेज विभाग के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ सुनील के कौशल ने बताया कि एबस्टिन एनोमली एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात हृदय रोग है, जो हर दो लाख जन्मे बच्चों में से एक बच्चे में पाया जाता है।उन्होंने बताया कि इस बीमारी में हृदय का ट्राइकस्पिड वाल्व सही तरह से विकसित नहीं हो पाता, जिससे मरीज को सांस फूलना, तेज धड़कन, थकान और आगे चलकर हार्ट फेल होने का खतरा रहता है।
डॉ कौशल ने कहा कि पहले ऐसे मरीजों में अधिकतर कृत्रिम वाल्व लगाया जाता था, लेकिन कॉन रिपेयर तकनीक में मरीज के अपने वाल्व को ही विशेष तरीके से ठीक किया जाता है। यह प्रक्रिया अत्यंत कठिन होती है क्योंकि वाल्व की बनावट सामान्य नहीं होती और हृदय के भीतर बेहद बारीक स्तर पर काम करना पड़ता है। ऑपरेशन के दौरान कुछ मिलीमीटर की भी गलती से जन का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए यह सर्जरी केवल अनुभवी कार्डियक सर्जन और अत्याधुनिक सुविधाओं वाले चुनिंदा केंद्रों में ही की जाती है। Jaipur News
उन्होंने बताया कि अपना वाल्व बच जाने से मरीज को जीवन भर खून पतला करने वाली दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती। इससे अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण, वाल्व में थक्का बनने, भविष्य में दोबारा ऑपरेशन की संभावना तथा विशेष रूप से महिलाओं में गर्भावस्था से जुड़ी कई जटिलताओं का खतरा काफी कम हो जाता है। ऑपरेशन के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हो रही है और उसकी हृदय की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।महात्मा गांधी अस्पताल का यह सफल ऑपरेशन राज्य में उपलब्ध उच्चस्तरीय कार्डियक सर्जरी, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ टीम की दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है। Jaipur News