Insaniyat Campaign: संगरिया के सेवादारों की ऐसी अनूठी मिसाल, जो कर देगी आंखें नम

भूख से व्याकुल विक्षिप्त युवक का सहारा बने डेरा सच्चा सौदा के सेवादार

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Insaniyat Campaign: संगरिया, (सच कहूँ/सुरेंद्र जग्गा)। जब समाज में लोग अक्सर बेसहारा और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को देखकर मुंह फेर लेते हैं, ऐसे दौर में डेरा सच्चा सौदा के शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के सेवादारों ने इंसानियत की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है जो किसी की भी आंखों को नम कर दे। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से चलाई जा रही 'इंसानियत' मुहिम के तहत, संगरिया के डेरा अनुयायियों ने एक बार फिर एक भटकते हुए बेसहारा जीवन को नई जिंदगी दी है।जानकारी के अनुसार, श्री गंगानगर रोड स्थित बुदरवाली कैंटीन के पास लगभग 30 वर्षीय एक विक्षिप्त युवक को घूमते देखा। Sangaria News

मानसिक रूप से परेशान यह युवक मैले-कुचैले, बदबूदार कपड़ों में लिपटा हुआ था और भूख-प्यास से व्याकुल था। उसकी बदहाली को देखकर सेवादार कृष्ण डूडी इन्सां और कुलदीप इन्सां ने इसकी सूचना संगरिया के अन्य सेवादार भाइयों को दी। मौके पर पहुंचे सेवादारों ने सबसे पहले युवक को चाय-पानी व खाना खिलाया। इसके बाद स्थानीय पुलिस थाने को सूचित कर कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। सेवादार उसे संगरिया के एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केंद्र लेकर आए, जहां सेवादारों ने अपने हाथों से उसे नहलाया-धुलाया, साफ कपड़े पहनाए और तुरंत डॉक्टर को दिखाकर उसका इलाज शुरू करवाया।

जब तक युवक के परिजनों का पता नहीं मिलता, सेवादार करेंगे सार-संभाल 

जानकारी देते हुए सेवादार लाल चंद इन्सां ने बताया कि पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणा से संगरिया ब्लॉक द्वारा अब तक सैकड़ों ऐसे मानसिक रूप से परेशान गुमशुदा पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है। सेवादारों ने कहा कि, "जब तक इस मासूम युवक के अपनों का पता नहीं चल जाता, तब तक यह हमारे पास मानवता भलाई केंद्र में ही रहेगा। इसकी देखभाल, दवा और भोजन की जिम्मेदारी हमारी है। हम इसे अकेला नहीं छोड़ेंगे।" इस सेवा कार्य में मुख्य रूप से शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर कमेटी के जिम्मेवार भाई लालचंद इन्सां, महेश गोयल इन्सां, अमरा राम इन्सां, सुखदेव इन्सां, पवन इन्सां ब्लॉक प्रेमी सेवक लवली गर्ग इन्सां, तारा चंद विष्णु मिगलानी व सुरेन्द्र जग्गा इन्सां का सहयोग रहा।

अखिलेश, रायबरेली निवासी के रूप में हुई पहचान

सेवादारों की नि:स्वार्थ सेवा और दवा का असर यह हुआ कि युवक की मानसिक स्थिति में थोड़ा सुधार आया। जब उसने होश संभाला, तो उसने लड़खड़ाती जुबान से अपना नाम अखिलेश और घर का पता रायबरेली, उत्तर प्रदेश बताया। अपने परिवार से बिछड़कर दर-दर की ठोकरें खा रहे इस युवक के परिजनों का पता लगाने के लिए अब सेवादार भाई सोशल मीडिया और पुलिस प्रशासन का सहारा ले रहे हैं। Sangaria News

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