लोक-कल्याण की सीमाओं से आगे: कैसे ‘मुख्यमंत्री मावाँ-धीयाँ सत्कार योजना’ बनी पंजाब का नया सोशल मीडिया ट्रेंड

हास्य और रचनात्मकता के जरिए लाभार्थी योजना को दे रहे नई पहचान मावाँ-धीयाँ सत्कार योजना

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चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। Mukh Mantri Mawan Dheeyan Satkar Yojana: मोबाइल पर सुनाई देने वाली परिचित ‘टूँ-टूँ’ नोटिफिकेशन की आवाज अब पंजाब में महज एक अलर्ट नहीं रह गई है। यह हजारों सोशल मीडिया रीलों की पहचान बन चुकी है, जिनमें पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री मावाँ-धियाँ सत्कार योजना का जश्न मनाया जा रहा है। गाँवों के आंगनों से लेकर शहरों की चहल-पहल तक महिलाएँ गुनगुना रही हैं, नृत्य कर रही हैं, हास्य-व्यंग्य कर रही हैं और इस योजना से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रही हैं। उन्होंने एक कल्याणकारी योजना को राज्य के सबसे अनोखे डिजिटल ट्रेंड में बदल दिया है। आमतौर पर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा नीति घोषणाओं, बजट आवंटन, लाभार्थियों की संख्या और आधिकारिक प्रचार अभियानों तक ही सीमित रहती है। बहुत कम ऐसा होता है कि स्वयं लाभार्थी ही किसी योजना के सबसे बड़े प्रचारक बन जाएं। मावाँ-धीयाँ सत्कार योजना ने इस परंपरा को बदल दिया है।

पूरे पंजाब में महिलाएँ इस योजना से प्रेरित हास्य रीलें, डांस वीडियो, लिप-सिंक प्रस्तुतियाँ और रचनात्मक सोशल मीडिया पोस्ट तैयार कर रही हैं। उन्होंने इस योजना को जमीनी स्तर पर एक सोशल मीडिया आंदोलन का रूप दे दिया है। इस ट्रेंड की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्वाभाविक (आॅर्गेनिक) है। इसे आगे बढ़ाने के लिए न तो किसी सेलिब्रिटी का सहारा लिया गया है और न ही किसी पेड इन्फ्लुएंसर का। इसके बजाय लाभार्थी महिलाएँ स्वयं ट्रेंडिंग आॅडियो, लोकप्रिय रील फॉर्मेट और रोजमर्रा के हास्य के माध्यम से अपनी खुशी अपनी स्थानीय बोली में व्यक्त कर रही हैं, जिससे इस ट्रेंड को एक अलग पंजाबी रंग मिला है। 

जैसे-जैसे सरकारें नागरिकों से अधिक सार्थक तरीके से जुड़ने के नए रास्ते तलाश रही हैं, मावाँ धियाँ सत्कार योजना एक महत्वपूर्ण सीख प्रस्तुत करती है। सबसे प्रभावशाली संवाद अक्सर विज्ञापन एजेंसियों या आधिकारिक प्रचार अभियानों से नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज से जन्म लेता है, जिनके जीवन पर किसी नीति का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। पंजाब में लाभार्थियों ने एक कल्याणकारी योजना को जन-चर्चा में बदल दिया है एक ऐसा संवाद, जो सरकारी नारों के बजाय वास्तविक आवाजों, साझा अनुभवों और ‘टूँ-टूँ’ की परिचित धुन के माध्यम से फैल रहा है।

सोशल मीडिया पर छाई धुनों में एक की शुरुआत अब हर किसी की जानी-पहचानी इन लाईनों से होती है:

‘टूँ-टूँ बजे, टूँ-टूँँ बजे’ 

एक और लोकप्रिय गीत मजाकिया अन्दाज में यह कल्पना करता है कि खाते में पैसे आने के बाद खरीददारी कैसे होगी: 

‘देखीं आउणगे लिफाफ्यां च सूट मित्तरा, जदों टूँ-टूँ होवेगी’

इन लोकप्रिय धुनों व गीतों ने हजारों महिलाओं को अपनी वीडीयो बनाने के लिए प्रेरित किया है और यह गीत अब सीधे तौर पर इस योजना की पहचान बन गए हैं। इस ट्रैंड ने पुरूषों को भी हंसी-मजाक भरी प्रतिक्रियाओं (रिएक्शन) देने के लिए प्रेरित किया है। एक वायरल रैप में वह मजाकिया तरीके से पूछते हैं कि लाभ सिर्फ महिलाओं को ही क्यों मिल रहा है:-

‘सीएम मान नूं सुनेहा मेरा सिद्धा ही पहुँचा दयो, बंदिया दे खाते विच्च 500 ही पा दयो। ऐवें किते सारा पैसा बीबियांँ ते ना ला दयो, सानूँ वी माड़ी मोटी टूँ-टां सुना दयो।’ 

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