बेटे की हत्या का शक, मां ने बहू पर लगाया सनसनीखेज आरोप
मारपीट के दौरान बहू के बयान से गहरा हुआ संदेह, घर से जेवरात व सामान ले जाने का भी आरोप
हनुमानगढ़। झाम्बर गांव में करीब 60 वर्षीय विधवा महिला ने अपने बेटे की संदिग्ध मौत के मामले में उसकी पत्नी सहित दो जनों पर हत्या का संदेह जताया है। महिला का आरोप है कि मारपीट के दौरान बहू ने उसके सामने कहा कि वह उसके बेटे को पहले ही मरवा चुकी है। इस बयान के बाद बेटे की मौत को लेकर उसका संदेह और गहरा गया।
न्यायालय के इस्तगासे के आधार पर टाउन थाना पुलिस ने मृतक की पत्नी सुनीता पुत्री रायसिंह गोदारा निवासी झाम्बर हाल गांव कोहला, उसके भाई नरेन्द्र और मुकेश कूकणा पुत्र बनवारी लाल कूकणा निवासी झाम्बर के अलावा 5-7 अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। परिवाद में गीता पत्नी नोपाराम निवासी झाम्बर ने बताया कि उसका बेटा प्रहलाद राय 10 अप्रैल 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला था। बेटे की मौत के समय से ही उसे उसकी मृत्यु को लेकर संदेह था। प्रहलाद की मौत के बाद उसकी पत्नी सुनीता अपने बेटे भविष्य के साथ अपने पीहर गांव कोहला चली गई और वापस नहीं आई।
गीता के अनुसार 9 जुलाई 2026 को सुबह करीब 11 बजे सुनीता अपने भाई नरेन्द्र, मुकेश कूकणा और 5-7 अन्य लोगों के साथ उसके घर पहुंची। वहां आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज की और थाप-मुक्कों व लात-घूंसों से मारपीट की। सुनीता ने बाल पकड़कर घसीटा। शोर सुनकर उसकी पुत्री सुमन, नातिन किरण और पड़ोसी अजय मौके पर पहुंचे तथा उसे आरोपियों से छुड़ाया। इसके बाद आरोपियों ने उसे धमकाया। सुनीता ने कहा कि उसने उसके बेटे को पहले ही मरवा दिया और उसका भी कुछ नहीं हुआ। गीता का कहना है कि बहू के इस बयान के बाद उसे प्रहलाद की मौत में सुनीता और मुकेश की भूमिका होने का संदेह और पुख्ता हो गया।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने गीता के घर में रखे मकान के दस्तावेज, सोने-चांदी के जेवरात, फर्नीचर, कपड़े, बर्तन और अन्य घरेलू सामान एक कैंटर में भरकर अपने साथ ले गए। महिला को मारपीट के बाद घर में अचेत अवस्था में छोड़ दिया गया। गीता के अनुसार सुनीता और मुकेश ने अपने अवैध संबंधों के चलते प्रहलाद की हत्या कर दी। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने हत्या सहित अन्य आरोपों में बीएनएस की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच थाना प्रभारी लखवीर सिंह गिल कर रहे हैं। पुलिस जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि प्रहलाद की मौत के पीछे कोई आपराधिक साजिश थी या नहीं और मामले में नामजद लोगों की क्या भूमिका रही।